
भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान से वन विभाग के राज्यव्यापी पौधरोपण अभियान का शुभारंभ
IBEX NEWS BUREAU,शिमला, 25 जून।
पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाने के उद्देश्य से भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस), राष्ट्रपति निवास, शिमला तथा हिमाचल प्रदेश वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसी अवसर से हिमाचल प्रदेश वन विभाग के राज्यव्यापी पौधरोपण अभियान का औपचारिक शुभारंभ भी किया गया। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की तथा संस्थान परिसर में पौधारोपण कर अभियान का शुभारंभ किया।

अपने प्रेरक संबोधन में माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा और वनों का संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभाव आज पूरी दुनिया के सामने गंभीर चुनौती के रूप में उपस्थित हैं तथा इनके प्रभाव हिमालयी राज्यों में भी स्पष्ट रूप से अनुभव किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विगत वर्षों में हिमाचल प्रदेश ने प्राकृतिक आपदाओं के रूप में भारी क्षति का सामना किया है, जिससे प्रकृति के साथ संतुलित विकास की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट हुई है। उन्होंने शिमला के बदलते प्राकृतिक स्वरूप पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक समय शहर के अनेक क्षेत्र घने वनों से आच्छादित थे, किन्तु अनियोजित विकास और वृक्षों की कटाई के कारण हरित क्षेत्र निरंतर सिमटते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने के लिए समय रहते प्रभावी प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने वन विभाग द्वारा संचालित पौधरोपण एवं वन संरक्षण अभियानों की सराहना करते हुए इन्हें व्यापक जनसहभागिता से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया तथा वन संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव भी प्रस्तुत किए।
भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने मुख्य अतिथि सहित सभी माननीय न्यायाधीशों एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान केवल उच्चस्तरीय अनुसंधान का केंद्र ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय उत्तरदायित्व एवं सामाजिक सरोकारों के प्रति भी समान रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि संस्थान परिसर की समृद्ध प्राकृतिक विरासत के संरक्षण तथा हरित वातावरण को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं और वन विभाग के सहयोग से प्रारंभ किया गया यह अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
हिमाचल प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) डॉ. संजय सूद ने पर्यावरण एवं वन संरक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रदेश सरकार की विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं—राजीव गांधी वन संवर्धन योजना, मुख्यमंत्री वन विस्तार योजना तथा राजीव गांधी ग्रीन एडॉप्शन योजना—के माध्यम से राज्य की बंजर एवं अनुपयोगी भूमि को हरित आवरण में परिवर्तित करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के अंतर्गत राज्य में पाँच हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2030 तक हिमाचल प्रदेश के हरित आवरण में लगभग 32 प्रतिशत वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में वन विभाग निरंतर कार्य कर रहा है तथा इस लक्ष्य की प्राप्ति में जनसहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर, न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह, न्यायमूर्ति जियालाल भारद्वाज तथा न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में वन मंडल अधिकारी (प्रचार), हिमाचल प्रदेश, श्रीमती सरोज वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अखिलेश पाठक द्वारा किया गया। इस अवसर पर अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक आलोक नागर, मुख्य वन संरक्षक के. थिरूमल, मुख्य वन संरक्षक अनीश शर्मा, उप वन संरक्षक अनिकेत, रमन शर्मा, दिनेश पॉल, डॉ. सरोज वर्मा, मनीष रामपाल सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के राष्ट्रीय अध्येता, अध्येता, सह-अध्येता, अधिकारी एवं कर्मचारी भी कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


