
IBEX NEWS BUREAU,शिमला भरमौर/चंबा।
गद्दी समुदाय की पारंपरिक वेशभूषा को लेकर एक बार फिर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। भरमौर-पांगी के भाजपा विधायक डॉ. जनक राज ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को संबोधित एक सार्वजनिक टिप्पणी में गद्दी संस्कृति के सम्मान के लिए उनका आभार जताया, लेकिन साथ ही पारंपरिक वेशभूषा के “पूर्ण और मौलिक स्वरूप” को अपनाने की सलाह भी दी।
डॉ. जनक राज ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि किसी भी संस्कृति का सम्मान तभी पूर्ण माना जाता है, जब उसकी आत्मा और परंपरा दोनों का समान आदर किया जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा गद्दी समुदाय की पारंपरिक चोला-डोरा वेशभूषा धारण करना स्वागतयोग्य कदम है और इससे स्थानीय संस्कृति के प्रति सकारात्मक संदेश जाता है।


हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि गद्दी वेशभूषा केवल चोला-डोरा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी अपनी एक पूर्ण संरचना और सांस्कृतिक गरिमा है। उनके अनुसार पारंपरिक टाइट पजामा भी इस वेशभूषा का अभिन्न हिस्सा है। यदि पेंट के स्थान पर पारंपरिक पजामा धारण किया जाता, तो वेशभूषा अधिक पूर्ण और सांस्कृतिक मौलिकता के अनुरूप प्रतीत होती।
विधायक ने कहा कि लोक वेशभूषा केवल पहनावा नहीं, बल्कि समुदाय की पहचान, इतिहास और पूर्वजों की विरासत का जीवंत प्रतीक है। ऐसे में जब भी इसे सार्वजनिक मंच पर धारण किया जाए, तो उसके परंपरागत स्वरूप का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।
डॉ. जनक राज ने उम्मीद जताई कि यदि यह अनजाने में हुई चूक है तो भविष्य में इस विषय पर अधिक सावधानी बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे न केवल गद्दी संस्कृति का सम्मान बढ़ेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक भी सांस्कृतिक विरासत का सही स्वरूप पहुंचेगा।
राजनीतिक गलियारों में विधायक की इस टिप्पणी को मुख्यमंत्री पर सांस्कृतिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर एक परोक्ष नसीहत के रूप में देखा जा रहा है। गद्दी समुदाय की पारंपरिक पहचान और सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर शुरू हुई यह बहस अब सियासी रंग भी ले सकती है।


