
महिलाओं की आवाज़ दबाने के लिए FIR, ग्रामीणों में आक्रोश
IBEX NEWS,शिमला ।
शिमला ग्रामीण की चेवड़ी पंचायत में शराब ठेका खोलने के विरोध ने तूल पकड़ लिया है। पंचायत प्रधान, उप-प्रधान, वार्ड मेंबर, महिला मंडल की सदस्यों और नशा निवारण समिति के सभी सदस्यों ने सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने ठेका खुलने के पहले दिन से ही शांति पूर्ण विरोध किया। महिलाओं ने कई बार प्रशासन से गुहार लगाई कि गांव के पास शराब का ठेका खुलना समाज और युवाओं के लिए घातक है। लेकिन प्रशासन ने ठेका बंद करवाने के बजाय विरोध कर रही महिलाओं के खिलाफ ही केस दर्ज कर दिया।
पंचायत प्रधान ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“हमारा उद्देश्य सिर्फ समाज को नशे से बचाना था, लेकिन हमारी बात सुनने के बजाय महिलाओं को अपराधी बना दिया गया। ऐसी व्यवस्था में काम करना अब हमारे लिए असंभव है। इसलिए हम सामूहिक रूप से इस्तीफा दे रहे हैं।”
महिलाएं आक्रोश में
- महिला मंडल और नशा निवारण समिति की सदस्यों ने कहा कि “हम गांव की बहन-बेटियों को सुरक्षित और नशा मुक्त माहौल देना चाहती थीं, लेकिन अब हमें ही अपराधी की तरह ट्रीट किया जा रहा है।”
⚠️ प्रशासन पर उठे सवाल
- ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार शराब से कमाई चाहती है, लेकिन समाज की भलाई की बात सुनना नहीं चाहती।1
- अब यह मुद्दा शिमला ग्रामीण क्षेत्र में बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद बनता जा रहा है।
📍 अब सवाल यह है — क्या प्रशासन जनता की बात सुनेगा या शराब कारोबार के दबाव में जनभावनाओं को यूं ही कुचला जाएगा?




