
हाईकोर्ट का साफ संदेश—आरोप और आत्महत्या के बीच कड़ी साबित नहीं, सह-आरोपी को पहले ही सुप्रीम कोर्ट से राहत
IBEX NEWS,शिमला
पावर कॉरपोरेशन के दिवंगत चीफ इंजीनियर विमल नेगी की रहस्यमय मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की दलीलें हाईकोर्ट की कसौटी पर खरी नहीं उतर सकीं। जस्टिस वीरेंद्र सिंह की अदालत ने कहा कि एजेंसी आरोपों और कथित आत्महत्या के बीच ठोस और प्रत्यक्ष कड़ी पेश करने में असफल रही, जिसके चलते आरोपी आईएएस अधिकारी एवं तत्कालीन एमडी हरिकेश मीणा को नियमित जमानत दे दी गई।
अदालत ने स्पष्ट किया कि 28 अगस्त 2024 को भुगतान जारी होने और विमल नेगी की मौत के बीच सीधा संबंध दर्शाने वाला कोई निर्णायक साक्ष्य CBI पेश नहीं कर पाई। साथ ही यह भी नहीं बताया जा सका कि ठेकेदार को कथित लाभ पहुंचाना आत्महत्या के लिए उकसावे की श्रेणी में कैसे आता है?
कोर्ट ने माना कि एक बहुमूल्य जीवन की क्षति निस्संदेह गंभीर विषय है, लेकिन केवल इसी आधार पर किसी आरोपी को ट्रायल से पहले जेल में रखना न्यायसंगत नहीं है—खासकर तब, जब समान आरोपों में सह-आरोपी को पहले ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
CBI की ओर से दलील दी गई कि जांच अभी जारी है, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य फॉरेंसिक जांच में हैं और रिपोर्ट आना बाकी है। एजेंसी ने आशंका जताई कि जमानत मिलने से हिरासत में पूछताछ प्रभावित होगी। वहीं, बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि हरिकेश मीणा का मृतक से कोई प्रत्यक्ष संपर्क नहीं था और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सह-आरोपी जैसे ही हैं।
सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने 7 अप्रैल 2025 को दी गई अंतरिम राहत को स्थायी कर दिया। अदालत ने आदेश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में हरिकेश मीणा को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानती पर रिहा किया जाए, साथ ही जांच में सहयोग और गवाहों को प्रभावित न करने जैसी सख्त शर्तें भी लगाई गईं।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद विमल नेगी मौत मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया एक नए चरण में प्रवेश कर गई है।




