
IBEX NEWS,शिमला ।
जिला कांगड़ा में मीडिया की आड़ में ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ‘ए स्टार न्यूज़’ नामक वेब चैनल के मालिक अमीर चंद डोगरा को राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने एक निजी जमीन सौदे को लेकर एक व्यक्ति को सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी दी थी और दबाव बनाकर धन की मांग की। इस कार्रवाई से क्षेत्र में फर्जी पत्रकारिता और सोशल मीडिया दुरुपयोग पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
IBEX NEWS,शिमला ।
पत्रकारिता की आड़ में चल रहे कथित ब्लैकमेलिंग रैकेट का बड़ा भंडाफोड़ मंगलवार को सामने आया जब राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) की टीम ने पालमपुर निवासी और स्वयंभू वेब पत्रकार अमीर चंद डोगरा को दो लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों धर दबोचा। यही नहीं, आरोपी ने शिकायतकर्ता से एक कार की भी मांग की थी, जिसे पूरा न करने पर धमकियां दी जा रही थीं। जानकारी के अनुसार, पालमपुर में एक शिक्षण संस्थान चलाने वाले व्यक्ति ने विजिलेंस को शिकायत दी थी कि अमीर चंद डोगरा ने सोशल मीडिया के माध्यम से जमीन से जुड़ा एक वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। आरोपी ने जमीन खरीद के बहाने संस्थान संचालक से दो लाख रुपये नकद और एक कार की डिमांड की थी। जब यह बात हद से बढ़ी तो शिकायतकर्ता ने विजिलेंस से संपर्क किया।पूर्व नियोजित जाल में फंसा आरोपी
मंगलवार को विजिलेंस की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से पालमपुर स्थित संस्थान के दफ्तर में जाल बिछाया। जैसे ही आरोपी पैसे लेने पहुंचा, टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया और मौके से दो लाख रुपये नकद जब्त किए गए। आरोपी को तत्काल हिरासत में लेकर धर्मशाला ले जाया गया।
मीडिया के नाम पर चल रही ब्लैकमेलिंग का पर्दाफाश
राज्य सतर्कता ब्यूरो धर्मशाला के पुलिस अधीक्षक बलवीर सिंह ने पुष्टि करते हुए कहा कि आरोपी खुद को एक A Star News Channel का पत्रकार बताता है और मीडिया की आड़ में लोगों को डरा-धमकाकर अवैध लाभ उठाने की कोशिश कर रहा था। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
प्रशासन और समाज के लिए चेतावनी
क्या और भी हैं शामिल लोग?
विजिलेंस सूत्रों के अनुसार, यह जांच केवल अमीर चंद डोगरा तक सीमित नहीं रहेगी। उसके संपर्कों और पिछले कार्यों की भी गहनता से जांच की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं यह कोई संगठित ब्लैकमेलिंग गिरोह तो नहीं है जो पत्रकारिता के नाम पर काम कर रहा है। यह घटना स्पष्ट करती है कि मीडिया की स्वतंत्रता के नाम पर कानून से खिलवाड़ करने वालों पर अब शिकंजा कसना शुरू हो चुका है। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि ऐसे मामलों की जानकारी तुरंत कानून प्रवर्तन एजेंसियों को दें, ताकि सच्चे और झूठे पत्रकारों के बीच अंतर साफ हो सके।
गौरतलब है कि बिना पंजीकरण (लाइसेंस) के फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर न्यूज़ चैनल चलाना न केवल पत्रकारिता के मूल्यों के साथ धोखा है, बल्कि यह एक कानूनी उल्लंघन भी है। सरकार और प्रशासन की निष्क्रियता ने ऐसे फर्जी चैनलों को पनपने का मौका दिया है, जो जनता को गुमराह करने, ब्लैकमेलिंग और रिश्वतखोरी जैसे अपराधों में लिप्त पाए जा रहे हैं। यदि समय रहते इन पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह प्रवृत्ति न सिर्फ लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर करेगी, बल्कि जनविश्वास और सामाजिक व्यवस्था को भी गंभीर नुकसान पहुँचा सकती है। अब समय आ गया है कि सरकार स्पष्ट नीतियां, कड़ी निगरानी और प्रभावी दंड प्रणाली लागू कर डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र को पारदर्शी और जवाबदेह बनाए।




