
इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (ILD) की बढ़ती चुनौती, देशभर के नामी चेस्ट फिजिशियन साझा करेंगे अनुभव और नई उपचार पद्धतियां
पर्यावरण में आ रहे बड़े बदलाव, प्रदूषण, धूल-मिट्टी और आधुनिक जीवनशैली (लाइफस्टाइल) इस सांस की गंभीर बीमारी के मुख्य कारक बनकर उभर रहे हैं।
यह 200 से अधिक फेफड़ों के विकारों का एक समूह है, जो फेफड़ों के ऊतकों (Lung Tissues) को नुकसान पहुँचाता है, जिससे मरीज को सांस लेने में भारी तकलीफ होती है और ऑक्सीजन का स्तर गिरने लगता है।
IBEX NEWS BUREAU,शिमला
शिमला, 5 जून। बदलते मौसम, बढ़ते वायु प्रदूषण, धूम्रपान, औद्योगिक धूल-कणों के संपर्क और बदलती जीवनशैली के बीच फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (ILD) एक ऐसी जटिल बीमारी है, जो धीरे-धीरे फेफड़ों को क्षति पहुंचाकर मरीज की सांस लेने की क्षमता को प्रभावित करती है। समय पर पहचान और उचित उपचार न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है।विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार खांसी, सांस फूलना, सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी और फेफड़ों की क्षमता में गिरावट जैसे लक्षणों की समय पर जांच से ILD जैसी गंभीर बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है। इससे उपचार की सफलता बढ़ती है और मरीजों की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है।
इन्हीं चुनौतियों और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर व्यापक चर्चा के लिए सोसाइटी ऑफ पल्मोनरी मेडिसिन, हिमाचल प्रदेश के तत्वावधान में HP-PULMOCON 2026 का आयोजन आज शनिवार को शिमला में किया जा रहा है। एक दिवसीय राज्यस्तरीय सम्मेलन एवं सीएमई (Continuing Medical Education) का मुख्य विषय “Interstitial Lung Diseases” रखा गया है।जिसमे बीमारी की अर्ली डिटेक्शन पर रहेगा विशेष फोकस रहेगा ।अब इस बीमारी के मरीज लगातार बढ़ ही रहें है ।फेफड़ों की बीमारियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (ILD) जैसी जटिल बीमारियों की पहचान और उपचार के लिए केवल पारंपरिक अनुभव पर्याप्त नहीं है, बल्कि नवीनतम शोध, आधुनिक जांच तकनीकों और बहु-विषयक (Multidisciplinary) दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। ऐसे में HP-PULMOCON 2026 जैसे सम्मेलन चिकित्सकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मंच साबित होते हैं।
इस सम्मेलन में विशेषज्ञ चिकित्सक ILD की शुरुआती पहचान, HRCT स्कैन की व्याख्या, नई दवाओं, एंटी-फाइब्रोटिक थेरेपी, हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस और फेफड़ों की फाइब्रोसिस जैसी जटिल स्थितियों के प्रबंधन पर चर्चा करेंगे। इससे प्रदेश के चिकित्सकों को नवीनतम वैज्ञानिक जानकारी और उपचार पद्धतियों से अपडेट रहने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ILD के कई मामले शुरुआती चरण में सामान्य खांसी, सांस फूलने या अस्थमा जैसी समस्याओं के रूप में सामने आते हैं। यदि चिकित्सकों को बीमारी के शुरुआती संकेतों की बेहतर समझ हो तो मरीजों का समय रहते निदान संभव है, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता और जीवनकाल दोनों में सुधार किया जा सकता है।

सम्मेलन में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श, जटिल मामलों की समीक्षा और अनुभवों का आदान-प्रदान भी होगा। इससे चिकित्सकों को वास्तविक केस स्टडी से सीखने और अपने क्लिनिकल निर्णयों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे वैज्ञानिक सम्मेलन केवल ज्ञानवर्धन का माध्यम नहीं होते, बल्कि मरीजों तक बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि HP-PULMOCON 2026 को फेफड़ों की बीमारियों के क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सकों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक और वैज्ञानिक मंच माना जा रहा है।
सम्मेलन का उद्घाटन प्रातः 11 बजे होगा। कार्यक्रम में आईजीएमसी शिमला के पूर्व प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (कार्डियोलॉजी) डॉ. पी.सी. नेगी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
सम्मेलन में देश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों से फेफड़ों के रोग विशेषज्ञ भाग लेकर ILD के विभिन्न पहलुओं पर अपने अनुभव और शोध साझा करेंगे। सम्मेलन में हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से आए चेस्ट फिजिशियन, पल्मोनोलॉजिस्ट और चिकित्सा विशेषज्ञ भाग लेंगे।इनमें प्रमुख रूप से:
- पीजीआई चंडीगढ़ से एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सैजल दुरिया
- एम्स, नई दिल्ली से एडिशनल प्रोफेसर डॉ. करण मदान
- एम्स जोधपुर से डॉ. नवीन दत्त
- पटियाला से डॉ. कार्तिक
- देहरादून से डॉ. अभिषेक
- आईजीएमसी शिमला, डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा तथा हमीरपुर मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ चिकित्सक

इन विषयों पर होगी विशेष चर्चा
- ILD की समय रहते पहचान और क्लिनिकल संकेत
- हाई-रिजोल्यूशन सीटी (HRCT) की भूमिका
- हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस की नई डायग्नोस्टिक रणनीतियां
- IPF (Idiopathic Pulmonary Fibrosis) का मूल्यांकन और उपचार
- एंटीफाइब्रोटिक दवाओं की उपयोगिता
- आईसीयू और वार्ड में ILD मरीजों का प्रबंधन
- मल्टीडिसिप्लिनरी केस डिस्कशन और चुनौतीपूर्ण मामलों की समीक्षा

HP-PULMOCON 2026 को हिमाचल प्रदेश में फेफड़ों की बीमारियों के बढ़ते बोझ, आधुनिक निदान तकनीकों और प्रभावी उपचार रणनीतियों पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण चिकित्सा मंच माना जा रहा है, जहां विशेषज्ञों का मंथन भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने की दिशा तय करेगा।





