
IBEX NEWS,शिमला।
राजकीय कन्या महाविद्यालय (RKMV) के इतिहास विभाग और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) ने भारतीय कला और सांस्कृतिक विरासत ट्रस्ट (INTACH) के सहयोग से “विरासत संरक्षण पर छात्र स्वयंसेवक प्रशिक्षण कार्यशाला” का आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु जागरूक करना और आवश्यक कौशल प्रदान करना था ।


कार्यशाला में छात्रों को मूर्त एवं अमूर्त विरासत की समझ से लेकर फील्डवर्क और दस्तावेजीकरण की बारीकियों तक विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।
इस कार्यशाला को चार प्रतिष्ठित वक्ताओं ने संबोधित किया:
🔸 पूर्णिमा दत्त
भारत की कला एवं वास्तुकला के ऐतिहासिक संदर्भ पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी विरासत को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
🔸 मालविका पठानिया
दस्तावेजीकरण तकनीकों और संरक्षण प्रक्रियाओं पर आधारित व्यावहारिक अनुभव साझा किए और फील्ड सर्वे व पुनर्स्थापनाओं के उदाहरणों से छात्रों को अवगत कराया।
🔸 राजा भसीन
छात्रों को शिमला के औपनिवेशिक इतिहास की यात्रा पर ले गए और इसकी स्थापत्य एवं सांस्कृतिक विरासत को समझाया।
🔸 क्रिस्टीना शांगने
छात्रों को विरासत संरक्षण में स्वयंसेवकों की भूमिका बताई और INTACH के सामुदायिक परियोजनाओं में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

कार्यशाला में छात्रों को हैंड्स-ऑन अनुभव के माध्यम से गेयटी थियेटर, कुल्लू शॉल और दशहरा, चंबा रुमाल जैसे स्थानीय विरासत विषयों पर जानकारी दी गई, जिससे वे अपने आसपास की संस्कृति से गहराई से जुड़ सके।
कार्यशाला का संवादात्मक प्रारूप छात्रों के लिए सीखने का एक जीवंत और समृद्ध अनुभव साबित हुआ।

इतिहास विभाग ने INTACH और सभी वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं शिक्षा और समुदाय की शक्ति को दर्शाती हैं जो हमारी परंपराओं, संरचनाओं और कहानियों के संरक्षण में सहायक हैं।




