
IBEX NEWS,शिमला ।
पारंपरिक आस्था और सांस्कृतिक भावनाओं से ओतप्रोत देव मिलन उत्सव के अंतिम पड़ाव पर आज एक अत्यंत मार्मिक क्षण देखने को मिला। छितकुल गांव की इष्ट देवी माता छितकुल ने अपने धर्मपतिके रूप में माने जाने वाले देव बद्रीविशाल को भावुकता भरे वातावरण में विदाई दी। यह दृश्य न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक था, बल्कि उसमें एक पारिवारिक भावनात्मक लगाव भी झलका ।
इस तरह बायोलिंग देव मिलन का समापन आज सांगला घाटी में हुआ।माता देवी के पति बद्री विशाल, छत्र सिंह,कलम सिंह अपने निवास स्थान कामरू गांव के लिए रवाना हुए ।
देवताओं की भव्य शोभायात्रा में श्रद्धालु भारी संख्या में एकत्रित हुए थे। नरसिंघा,ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच जब विदाई का समय आया, तो चारों ओर एक भावुक मौन छा गया। मातृ स्वरूपा देवी छितकुल ने आंगन से अपने पति देवता को पारंपरिक रीति-रिवाज़ के अनुसार आगामी तीन वर्षों के लिए विदाई दी। यह वह क्षण था जब कई श्रद्धालुओं की आंखें भावना से भर आईं। लोगों ने हाथ जोड़कर नमन किया और विदाई के साथ-साथ मन में पुनर्मिलन की कामना की।
देव मिलन उत्सव न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का संगम होता है, बल्कि यह हिमाचल की समृद्ध देव परंपरा और सामाजिक संरचना का भी प्रतिबिंब है। पति-पत्नी रूप में देवी-देवता का यह संबंध, मानवीय भावनाओं के अत्यंत निकट प्रतीत होता है। देवता जब लौटते हैं, तो मानो एक परिवार का कोई सदस्य घर से विदा हो रहा हो।
इस मौके पर स्थानीय जनमानस की भागीदारी भी विशेष रही। ग्रामवासी, तीर्थयात्री और देवी-देवताओं के सेवक — सभी इस क्षण के साक्षी बने। महिलाओं ने देवताओं को पारंपरिक गीतों के साथ विदाई दी, वहीं बुजुर्गों ने इस परंपरा की निरंतरता को संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बताया।




