
“सरकार के दावे हवा-हवाई, लोग खुद बना रहे पुल” — पूर्व मंत्री डॉ. रामलाल मार्कडेय
सड़क संपर्क टूट जाने से किसानों की तैयार मटर और गोभी की फसलें खेतों में ही सड़ रही हैं।
IBEX NEWS,शिमला
लाहौल-स्पीति जिले की मयाड़ घाटी हाल ही में आई बाढ़ से भारी तबाही झेल रही है। घाटी के गांवों में तबाही के निशान हैं, तीन पुल बह गए हैं, लिंक रोड पूरी तरह से टूट गया है और मयाड़ नाले का पुल डूब चुका है। सड़क संपर्क टूट जाने से किसानों की तैयार मटर और गोभी की फसलें खेतों में ही सड़ रही हैं।
आपदा से प्रभावित करपट, चांगुट, उडगोस, तिंगरेट और आसपास के गांवों का दौरा करने पहुंचे पूर्व मंत्री डॉ. रामलाल मार्कडेय ने प्रदेश सरकार पर राहत कार्यों में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
डॉ. रामलाल मार्कडेय के आरोप लगाया है कि सरकार के दावे केवल कागज़ों तक सीमित हैं, जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हो रहा है घाटी के लोग आज भी आपदा के डर से उभरे नहीं हैं और उन्हें फौरी राहत नहीं मिल पाई है।सड़कें और संपर्क मार्ग खोलने का कार्य युद्धस्तर पर होना चाहिए था, लेकिन ऐसा कुछ देखने को नहीं मिल रहा।लोग मजबूरी में खुद मिलकर अस्थाई पुल बना रहे हैं ताकि गांव और खेतों तक आवागमन बहाल हो सके।प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और पेयजल की व्यवस्था पूरी तरह ठप है।
🌾 किसानों की समस्या
मटर और गोभी जैसी नकदी फसलें तैयार हैं, लेकिन सड़क संपर्क न होने के कारण मंडियों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।कई लोगों के घर और गौशालाएं ढह गईं।घरों में मलबा भर गया और बगीचे उजड़ गए।दो पंचायतें पूरी तरह प्रभावित हैं और लोग बुरी तरह संकट में हैं।
डॉ. मार्कडेय ने सरकार से मांग की है कि—तुरंत राहत और पुनर्वास कार्य शुरू किए जाएं।प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाए।अस्थाई पुलिया और संपर्क मार्गों का निर्माण प्राथमिकता पर हो।
किसानों की फसलें सुरक्षित मंडियों तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रबंध किए जाएं।





