
130 विशेषज्ञों की उपस्थिति में पर्यावरण, संस्कृति और समुदाय पर मंथन; हिमाचली विरासत की झलक ने बाँधा समा
IBEX NEWS,शिमला
शिमला स्थित एमएसएचआईपीए (MSHIPA) में आईक्यूएसी, आरकेएमवी और अर्थ जस्ट ईकोसिस्टम्स फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “प्रकृति से संस्कृति” की ख्यातिप्राप्त शुरुआत हुई। भारत के विभिन्न राज्यों से पहुँचे 130 प्रतिभागियों ने भारतीय ज्ञान प्रणालियों पर आधारित विविध विषयों पर अपने विचार साझा किए। यह सम्मेलन 30 नवंबर 2025 को संपन्न होगा।
सम्मेलन का मुख्य फोकस भारतीय परंपराओं में निहित शिल्प, संस्कृति और समुदाय की वह ज्ञान-धारा है, जिसने सदीयों से पर्यावरणीय संतुलन और सामाजिक सहयोग का मार्ग दिखाया है। प्रमुख विषयों में शामिल रहे—
- पर्यावरणीय स्थिरता
- ग्रामीण आजीविका
- स्वदेशी तकनीकें
- जैव विविधता संरक्षण
- सांस्कृतिक धरोहर
- पाक-परंपराओं का फ्यूजन
पहले दिन हुए विचार-विमर्श में पर्यावरणीय चुनौतियों, ग्राम-आधारित आजीविका, और स्थानीय तकनीकों के संवर्द्धन पर गहन चर्चाएँ हुईं। मंथन सत्रों को अकादमिक जगत, प्रशासनिक सेवाओं और नागरिक समाज के विशेषज्ञों ने समृद्ध बनाया।


विशिष्ट वक्ताओं ने दिए भविष्य के सुझाव
सम्मेलन के मंच पर उपस्थित रहे—
- प्रबोध सक्सेना, पूर्व मुख्य सचिव, हिमाचल प्रदेश
- प्रो. महावीर सिंह, कुलपति, एचपीयू
- रमेश नेगी, पूर्व IAS अधिकारी
- प्रो. आदित्य मुखर्जी एवं प्रो. मृदुला मुखर्जी, जेएनयू से सेवानिवृत्त प्रोफेसर
- विजय महाजन, राजीव गांधी फाउंडेशन
इन सभी विशेषज्ञों ने सस्टेनेबिलिटी, इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च, लोकतांत्रिक सहभागिता, स्किल डेवलपमेंट, तथा विविधता और समावेशन की अनिवार्यता पर जोर देते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भारतीय ज्ञान परंपराओं की ओर लौटना समय की मांग है।


हिमाचली संस्कृति ने बटोरी वाहवाही
कार्यक्रम में हिमाचली परिधान, हस्तशिल्प और पारंपरिक सौंदर्य को दर्शाता एक विशेष फैशन शो आकर्षण का केंद्र रहा। विविध पहाड़ी पहनावों ने लोगों को हिमाचल की सांस्कृतिक समृद्धि व प्राकृतिक सौंदर्य से रूबरू कराया।
मुख्य थीम्स जिन्होंने दिया दिशा-निर्देश
- क्राफ्ट, कल्चर और कम्युनिटी में भारतीय ज्ञान प्रणाली
- पर्यावरणीय स्थिरता
- ग्रामीण संस्कृति और आजीविका
- स्वदेशी तकनीकें
- जैव विविधता
- भारतीय व स्थानीय व्यंजनों की विरासत
सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय ज्ञान प्रणालियों की वैश्विक प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए SDGs के अनुरूप सस्टेनेबिलिटी और पर्यावरणीय जागरूकता को आगे बढ़ाना है।




