
IBEX NEWS,शिमला
IGMC शिमला की कैंसर सर्जरी टीम ने चिकित्सा इतिहास में एक और उल्लेखनीय सफलता दर्ज करते हुए 75 वर्षीय किन्नौर निवासी बुज़ुर्ग के शरीर से दो अलग-अलग अंगों में मौजूद कैंसर को एक ही सर्जरी में हटाकर उसकी जान बचा ली। डॉक्टरों ने मरीज के लिवर और दाईं किडनी में विकसित लगभग 3 किलो वज़नी फुटबॉल आकार के विशाल ट्यूमर को जटिल शल्य-प्रक्रिया के माध्यम से सफलतापूर्वक निकाल दिया।
Left Hepatectomy (लिवर के बाएँ भाग) और Right Radical Nephrectomy (दाईं किडनी) की संयुक्त शल्य-प्रक्रिया पूरी तरह सफल रही। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और उसे स्वस्थ पाकर अस्पताल से घर भेज दिया गया है।
आमतौर पर एक ही मरीज में एक साथ दो कैंसर केवल 2–3 प्रतिशत मामलों में पाए जाते हैं। ऐसे मामलों का ऑपरेशन करना अपने-आप में बहुत बड़ी चुनौती मानी जाती है।इस बेहद जटिल ऑपरेशन में मरीज की उम्र, सांस की समस्या, हाई BP, और दोनों अंगों को एक साथ ऑपरेट करने की कठिनाई सबसे बड़ी चुनौती थी।
हिमाचल प्रदेश के ट्राइबल जिला किन्नौर निवासी 75 वर्षीय बुज़ुर्ग को पेट में दर्द, चलने-फिरने में तथा खाने-पीने में परेशानी को लेकर अस्पताल आया था । मरीज ने IGMC शिमला के कैंसर विभाग में डॉ. रशपाल एस ठाकुर से OPD में परामर्श लिया। CT-Scan में मरीज को एक नहीं बल्कि दो अलग जगहों पर कैंसर होने की पुष्टि हुई—एक लिवर में और दूसरा दाईं किडनी में।इसके लिए और भी ढेरों टेस्ट किए गए ।डॉ रशपाल एस ठाकुर ने ibexnews से विशेष बातचीत में बताया कि बुजुर्ग की उम्र अधिक होने के साथ-साथ उन्हें सांस लेने में दिक्कत और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर समस्याएँ भी थीं, जिसके कारण ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा था। लेकिन चूंकि इस बीमारी का उपचार ऑपरेशन के अलावा संभव नहीं था, इसलिए मरीज को ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया।IGMC की विशेषज्ञ टीम ने मरीज के लिवर के बाएँ हिस्से को (Left Hepatectomy) और दाईं किडनी को (Right Radical Nephrectomy) निकालकर सफल ऑपरेशन किया।
- लिवर के बाएँ हिस्से को हटाने की सर्जरी को लेफ्ट हेपेटेक्टॉमी (Left Hepatectomy) कहते हैं। यह एक प्रकार की सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें लिवर के बाएँ लोब को हटाया जाता है, आमतौर पर ट्यूमर या अन्य बीमारियों के इलाज के लिए।
- दाईं किडनी को पूरी तरह से हटाने की सर्जरी को राइट रेडिकल नेफ्रेक्टॉमी (Right Radical Nephrectomy) कहते हैं। इसमें दाईं किडनी के साथ-साथ आसपास के ऊतकों और लिम्फ नोड्स को भी हटाया जा सकता है, आमतौर पर किडनी कैंसर के इलाज के लिए।

ट्यूमर का आकार फुटबॉल जितना बड़ा व वजन लगभग 3 किलोग्राम था।ऑपरेशन लगभग 6–7 घंटे तक चला और मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर 10वें दिन अस्पताल से छुट्टी पाकर घर भेज दिया गया। सर्जिकल टीम में डॉ. रश्मपाल ठाकुर (कैंसर सर्जन,डॉ. पुनीत महाजन (सर्जन),डॉ. अंशु अटरी (सीनियर रेज़िडेंट)और एनेस्थिसिया टीम में डॉ. अजय सूद एवं उनकी टीम रही ।सीनियर रेज़िडेंट Dr. Rohit Chauhan, तथा जूनियर रेज़िडेंट Dr. Gurpreet और Dr. Vandna , ऑपरेशन थिएटर में स्टाफ नर्स शालिनी शर्मा ने भी अहम योगदान दिया।
AIIMS दिल्ली से सुपर-स्पेशलाइजेशन कर चुके डॉ. रश्मपाल ठाकुर ने इस दुर्लभ और जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा कर IGMC का नाम राज्य में ही नहीं देश भर में स्थापित किया है।
कैंसर सर्जरी विभाग के लगातार जटिल और सफल ऑपरेशन के कारण आज हिमाचल के मरीजों को AIIMS या PGI रेफर करने की जरूरत पहले से बहुत कम हो गई है। IGMC शिमला की कैंसर सर्जरी टीम किसी भी जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक करने में सक्षम है।




