
मंडी: हरिहर अस्पताल में ईएनटी विशेषज्ञ ने जटिल ‘हिरीडिनियासिस’ मामले को सफलतापूर्वक सुलझाया
IBEX NEWS,शिमला
हरिहर अस्पताल, गुटकर, मंडी में कार्यरत ईएनटी (कान, नाक, गला) विशेषज्ञ डा. कुशांग ने एक अत्यंत दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण चिकित्सीय मामले को सफलतापूर्वक संभाला। यह मामला एक जीवित जोंक (Hirudinea) से संबंधित था, जो एक मरीज के नासिका गुहा (Nasal Cavity) में घुसकर लगातार 72 घंटे से अधिक समय तक रक्तशोषण कर रही थी।

मिली जानकारी के अनुसार, मरीज गंभीर और लगातार नासिका रक्तस्राव (Epistaxis) तथा नासिका अवरोध (Nasal Obstruction) की शिकायत लेकर अस्पताल पहुँचा था। प्राथमिक जांच में नासिका के भीतर किसी बाहरी वस्तु (Foreign Body) की उपस्थिति का संदेह हुआ।
डा. कुशांग ने इस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए, आवश्यक उपकरणों की सहायता से एक विस्तृत एंडोस्कोपिक नासिका जांच (Endoscopic Nasal Examination) की। जांच के दौरान, उन्होंने पाया कि नासिका के नथुने में एक जीवित, सक्रिय जोंक मजबूती से चिपकी हुई है और वह लगातार रोगी के श्लेष्मा झिल्ली (Mucous Membrane) से रक्त चूस रही थी। जोंक के आकार और उसके चिपके रहने की स्थिति के कारण रोगी को तीव्र बेचैनी और रक्त की हानि हो रही थी।
डा. कुशांग और उनकी टीम ने अत्यधिक सावधानी और विशेषज्ञता के साथ जोंक को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। यह प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि जोंक को बलपूर्वक हटाने से नासिका के संवेदनशील ऊतकों को गंभीर क्षति पहुँच सकती थी, साथ ही जोंक के टुकड़े अंदर रहने का खतरा भी था, जिससे संक्रमण (Infection) और अन्य जटिलताएँ (Complications) उत्पन्न हो सकती थीं।
सफल निष्कासन के बाद, रोगी ने तत्काल राहत महसूस की और उसकी स्थिति स्थिर बताई गई है। डा. कुशांग ने इस घटना को नासिका हिरीडिनियासिस (Nasal Hirudiniasis) का एक विरल मामला बताया, जो अक्सर दूषित जल के संपर्क में आने के कारण होता है। उन्होंने लोगों को जल स्रोतों का उपयोग करते समय अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी है। यह सफल हस्तक्षेप हरिहर अस्पताल की विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।





