
IBEX NEWS,शिमला:अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से चल रहे संगठनात्मक इंतज़ार को खत्म करते हुए शुक्रवार को 11 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ‘संगठन सृजन अभियान’ के तहत इन नियुक्तियों को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य आगामी राजनीतिक चुनौतियों से पहले जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करना है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रदेश के 11 जिलों के लिए नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। इस पुनर्गठन में मंडी से चंपा ठाकुर, कांगड़ा से अनुराग शर्मा और हमीरपुर से सुमन भारती शर्मा जैसे अनुभवी चेहरों को कमान सौंपी गई है। गौरतलब है कि नवंबर 2024 में प्रदेश कार्यकारिणी और जिला इकाइयों को भंग किए जाने के करीब 13 महीने बाद यह नियुक्तियां हुई हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियुक्तियों में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबियों को प्रमुखता मिली है, जिसका उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रिय और मजबूत बनाना है। फिलहाल इस सूची में किन्नौर और शिमला ग्रामीण को शामिल नहीं किया गया है, लेकिन नए प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार के नेतृत्व में संगठन के इस विस्तार को हिमाचल कांग्रेस के लिए एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।


किन्नौर जिला अध्यक्ष के पद को ‘होल्ड’ पर डाल दिया गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दिल्ली दरबार में मचे घमासान के कारण एक बार फिर सीमावर्ती जिले का निर्णय अटक गया है।
पहली बार नहीं है जब किन्नौर का मामला दिल्ली की फाइलों में दबा हो। इससे पूर्व विधानसभा चुनावों के दौरान भी टिकट वितरण को लेकर भारी रस्साकशी हुई थी और आखिरी वक्त तक संशय बना रहा था। अब संगठन के पुनर्गठन में भी वही ‘फेरा-फेरी’ देखने को मिल रही है। जानकारों का कहना है कि स्थानीय नेताओं और प्रदेश के बड़े दिग्गजों के बीच तालमेल की कमी के कारण आलाकमान किसी एक नाम पर मुहर नहीं लगा पा रहा है।
प्रमुख बिंदु:
• 13 महीने का इंतज़ार खत्म: नवंबर 2024 में प्रदेश, जिला और ब्लॉक इकाइयों को भंग किए जाने के 13 महीने से अधिक समय बाद ये नियुक्तियां हुई हैं।
• मुख्यमंत्री का प्रभाव: राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन नियुक्तियों में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबियों को प्रमुखता दी गई है, विशेषकर हमीरपुर और शिमला शहरी में।
• किन्नौर और शिमला ग्रामीण शेष: इस सूची में फिलहाल किन्नौर और शिमला ग्रामीण जिलों के अध्यक्षों के नाम शामिल नहीं हैं।
• पुनर्गठन की शुरुआत: नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार ने कार्यभार संभालने के बाद संगठन को तीन महीने के भीतर पुनर्गठित करने का वादा किया था, जिसकी दिशा में यह पहला बड़ा कदम है।





