
पांगी घाटी से किलाड़ तक मरीज ढोने को मजबूर लोग, राहत सिर्फ़ काग़ज़ों में,स्नो कटर बने सफेद हाथी
IBEX NEWS,शिमला
पांगी घाटी की शून पंचायत से इंसानियत और बेबसी की तस्वीर सामने आई है। शून पंचायत निवासी भूपिंदर के 14 वर्षीय पुत्र साहिल की तबीयत पिछले चार दिनों से लगातार बिगड़ती जा रही थी। मुंह में छाले होने के कारण साहिल कुछ भी खाने-पीने में असमर्थ था और दिन-प्रतिदिन कमजोर होता जा रहा था।
इलाके में भारी बर्फ़बारी के कारण सड़कें पूरी तरह बंद है और एंबुलेंस या अन्य वाहन सेवा ठप्प । मजबूरी में परिजनों ने साहिल को अस्पताल पहुंचाने के लिए उसे पीठ पर उठाने का फैसला किया। करीब चार फ़ुट मोटी बर्फ़, कड़ाके की ठंड और फिसलन भरे रास्तों के बीच पिता और परिजनों ने 33 किलोमीटर तक साहिल को पीठ पर उठाकर किलाड़ की ओर सफ़र तय किया और किलाड़ तक आगे सात किलोमीटर की दूरी जिला प्रशासन की मदद से पूरी की ।
लंबे और जोखिम भरे इस सफ़र के बाद कहीं जाकर प्रशासन की एक गाड़ी से मदद मिल पाई, जिससे साहिल को आगे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। पूरे रास्ते को पूरा करने में लगभग 11घंटे लग गए ।भूपिन्दर का कहना है कि सुबह 6बजे घर से निकले थे और शाम पाँच बजे अस्पताल पहुंचे हैं । चिकित्सक बता रहे हैं कि बेटे को चिकनपॉक्स है । कई टेस्ट लिखे हैं ।उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि सड़क से बर्फ शीघ्र हटाई जाए ।
सेचू और शून पंचायतों के बीडीसी एवं भाजपा मंडल अध्यक्ष सतीश राणा ने हालात पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि बर्फ़बारी के नौ दिन बीत जाने के बावजूद प्रशासन सड़कों से बर्फ़ नहीं हटा पाया है, जिससे आम जनता भारी परेशानियों का सामना कर रही है। उन्होंने जल्द सड़क बहाली, आपात स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था और दुर्गम इलाकों के लिए विशेष राहत इंतज़ामों की मांग की है।यह घटना पांगी घाटी के दुर्गम क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करती है, जहां आज भी लोग विपरीत परिस्थितियों में अपने अपनों की जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।





