
गणतंत्र दिवस प्रोटोकॉल विवाद पर मंत्री यादवेंद्र गोमा ने मंडी DC के खिलाफ विधानसभा में विशेषाधिकार हनन नोटिस ठोका
IBEX NEWS,शिमला
हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासनिक तंत्र के बीच तनाव अब खुलकर सामने आ गया है। प्रदेश के युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री यादवेंद्र गोमा ने मंडी के जिला कलेक्टर अपूर्व देवगन (IAS) के खिलाफ विधानसभा में विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का नोटिस देकर सत्ता और सिस्टम के रिश्तों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।राजनीतिक रूप से यह विवाद इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले भी प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री अफसरशाही की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा चुके हैं। पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह प्रशासनिक कार्यशैली को निशाने पर ले चुके हैं। वहीं, उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सरकार के तीन साल के जश्न के दौरान मंच से तीखे शब्दों में अफसरशाही पर नाराज़गी जाहिर करते हुए कड़े बोल बोले थे, जिसे राजनीतिक हलकों में असामान्य और संकेतात्मक माना गया।
अब ताजा मामला 26 जनवरी गणतंत्र दिवस समारोह से जुड़ा है। मंत्री गोमा एक दिन पूर्व, 25 जनवरी 2026 को मंडी पहुंचे थे। मंत्री का आरोप है कि उनके आगमन के समय न तो मंडी के डीसी मौके पर मौजूद थे और न ही उनकी अनुपस्थिति को लेकर कोई पूर्व सूचना, आधिकारिक पत्राचार या प्रतिनिधि तैनात किया गया। मंत्री ने इसे न केवल सरकारी प्रोटोकॉल बल्कि संवैधानिक मर्यादा का भी सीधा उल्लंघन बताया है।
राजनीतिक दृष्टि से यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि नियमों के अनुसार किसी जिले में राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम से पहले किसी कैबिनेट मंत्री के आगमन पर जिला प्रशासन की औपचारिक मौजूदगी अनिवार्य होती है। मंत्री का कहना है कि यह चूक किसी सामान्य प्रशासनिक भूल के दायरे में नहीं आती, बल्कि यह निर्वाचित प्रतिनिधि और विधानसभा के विशेषाधिकारों की अवहेलना है।
अपने नोटिस में मंत्री गोमा ने तीन बिंदुओं पर कड़ी आपत्ति जताई है—
पहला, डीसी मंडी द्वारा कोई पूर्व या पश्चात सूचना न देना;
दूसरा, स्वयं उपस्थित न होकर प्रशासनिक जिम्मेदारी से बचना;
और तीसरा, इस पूरे घटनाक्रम से संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचना।
मंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि इस शिकायत को विधानसभा की कार्यविधि एवं संचालन नियमावली के अध्याय-XII के नियम 75 के तहत औपचारिक विशेषाधिकार हनन नोटिस के रूप में स्वीकार किया जाए। साथ ही उन्होंने डीसी मंडी से स्पष्टीकरण तलब करने और भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी करने की मांग भी की है।
मंत्री यादवेंद्र गोमा ने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“यह सिर्फ मेरा अपमान नहीं है, बल्कि विधानसभा के विशेषाधिकारों की अवहेलना है। प्रशासनिक अधिकारियों को निर्वाचित संस्थाओं और संवैधानिक पदों के सम्मान को समझना ही होगा।”
फिलहाल मंडी डीसी की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि विधानसभा अध्यक्ष इस नोटिस को स्वीकार करते हैं, तो मामला विशेषाधिकार समिति को भेजा जाएगा, जहां प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर बहस संभव है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश में राजनीति और नौकरशाही के संबंधों को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है और सत्ता-प्रशासन संतुलन को लेकर बहस को और तेज करेगा।




