
यांगला गांव से गोंधला तक 2 किलोमीटर खतरनाक रास्ता तय, प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल
IBEX NEWS,shimla
हिमाचल प्रदेश के शीतमरूस्थल ट्राइबल जिला लाहौल स्पीति में आज यांगला गांव से मानवता और मजबूरी की एक मार्मिक तस्वीर सामने आई, जहां गंभीर रूप से बीमार और चलने-फिरने में पूर्णतः असमर्थ प्रदीप मालपा की माता को ग्रामीणों ने कंधों पर उठाकर उपचार के लिए गोंधला चिकित्सालय तक पहुंचाया। बंद पड़ी सड़क और प्रशासनिक लापरवाही के कारण मरीज को दो दिन तक घर में ही रखने को मजबूर होना पड़ा।
जानकारी के अनुसार दो दिन पहले प्रदीप मालपा ने लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता (JE) से यांगला संपर्क सड़क खुलवाने का आग्रह किया था, लेकिन सड़क खोलने के लिए भेजी गई मशीन मात्र 100 मीटर भी आगे नहीं बढ़ पाई। सड़क खुलने की आस में परिजनों ने मरीज को घर पर ही रखा, लेकिन स्वास्थ्य बिगड़ने पर आखिरकार गांव के लोगों को स्वयं पहल करनी पड़ी।वायरल वीडियो को देखकर स्वयं अंदाजा लगाया जा सकता है कि कड़ाके की ठंड में किस तरह से मरीज को इलाज दिलाने के लिए लोग जद्दोजहद कर रहे हैं ।
ग्रामीणों ने एसडीओ और एक्सईएन लोक निर्माण विभाग से भी सड़क बहाली की गुहार लगाई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। मजबूरन ग्रामीणों ने मरीज को कंधों पर उठाकर करीब दो किलोमीटर लंबे, खड़ी उतराई-चढ़ाई और बेहद खराब रास्ते से गोंधला तक पहुंचाया, जहां प्राथमिक जांच के बाद चिकित्सकों ने महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें कुल्लू रेफर कर दिया।
इस घटना ने एक बार फिर दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, विशेषकर सड़कों और आपात स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क खोल दी जाती, तो मरीज को इस अमानवीय पीड़ा से नहीं गुजरना पड़ता। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि यांगला संपर्क सड़क को शीघ्र बहाल किया जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी मजबूरी न झेलनी पड़े।




