
12 फरवरी की आम हड़ताल में भागीदारी और 24 फरवरी को किसान–बागवान सम्मेलन का निर्णय
IBEX NEWS,शिमला , 6 फ़रवरी।
हिमाचल सेब उत्पादक संघ की ब्लाक स्तरीय बैठक गुरुवार को जुब्बल में संपन्न हुई, जिसमें विभिन्न गांवों में गठित स्थानीय इकाइयों से कार्यकारिणी सदस्यों ने भाग लिया। बैठक में सेब उत्पादक बागवानों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा आगामी संघर्ष कार्यक्रमों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक की अगुवाई करते हुए संघ के पदाधिकारी संजय कुमार ने विगत 19 जनवरी को आयोजित सचिवालय घेराव कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय प्रभावित बागवानों की सक्रिय भागीदारी के चलते प्रशासन पर तत्काल प्रभाव पड़ा और संबंधित मामलों में प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता देखने को मिली। उन्होंने संगठनात्मक एकता और निरंतर संघर्ष के महत्व पर जोर दिया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए राज्य कमेटी सदस्य संजय चौहान ने अपने संबोधन में बागवानों के सामने खड़े गंभीर संकटों को रेखांकित किया। उन्होंने भूमि से बेदखली और घरों की तालाबंदी की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौतों को किसानों और बागवानों के हितों के विरुद्ध बताया। इसके अतिरिक्त बीज (सीड) बिल, मनरेगा को कमजोर किए जाने, स्मार्ट मीटर लगाए जाने तथा बाजार मध्यस्थता योजना के बजटीय प्रावधानों में की गई कटौती को भी कृषि-विरोधी कदम करार दिया।
सामूहिक चर्चा के पश्चात बैठक में दो प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। पहले प्रस्ताव के तहत आगामी 12 फरवरी 2026 को होने वाली राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल में हिमाचल किसान सभा के साथ-साथ सेब उत्पादक संघ से जुड़े किसान-बागवानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए प्रत्येक स्थानीय इकाई में संबंधित मुद्दों पर किसानों और बागवानों को जागरूक करने तथा उनकी अधिकतम उपस्थिति सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।
दूसरे प्रस्ताव के अंतर्गत आगामी 24 फरवरी 2026, मंगलवार को हाटकोटी में जुब्बल ब्लाक का “किसान–बागवान सम्मेलन” आयोजित करने का निर्णय लिया गया। सम्मेलन में संगठन के विस्तार, आगामी विधानसभा सत्र से पहले प्रमुख मुद्दों को उठाने तथा आंदोलनात्मक गतिविधियों की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने कृषि और बागवानी पर मंडरा रहे संकटों पर गहरी चिंता जताते हुए पारित प्रस्तावों का समर्थन किया और सामूहिक संघर्ष के माध्यम से अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर लड़ने का संकल्प लिया।




