
PIT NDPS एक्ट के तहत बड़ी स्ट्राइक; 7 साल में 9 बार पकड़ा गया मनोज उर्फ मन्ना अब सलाखों के पीछे
IBEX NEWS,शिमला ।
राजधानी शिमला को नशा मुक्त करने के लिए जिला पुलिस ने अब तक की सबसे निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस ने नशे के काले कारोबार की कमर तोड़ते हुए चार कुख्यात तस्करों को PIT NDPS अधिनियम (निवारक नजरबंदी) के तहत गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई का मुख्य निशाना बना है मनोज उर्फ मन्ना, जो पुलिस की फाइलों में एक ‘अनसुधार अपराधी’ (Habitual Offender) के रूप में दर्ज है।




मनोज मन्ना: गिरफ्तारी का ‘नॉन-स्टॉप’ रिकॉर्ड
शिमला के कार्याली निवासी मनोज उर्फ मन्ना का आपराधिक इतिहास चौंकाने वाला है। वर्ष 2018 से लेकर 2025 तक, मन्ना के खिलाफ कुल 9 FIR दर्ज की गई हैं।
• ढली थाने में आतंक: अकेले ढली पुलिस स्टेशन में इसके खिलाफ 8 मामले दर्ज हैं।
• 2025 में ही 3 मामले: इस साल के शुरुआती चार महीनों (जनवरी, फरवरी और अप्रैल) में मन्ना को तीन बार चिट्टे के साथ पकड़ा गया, लेकिन वह हर बार जमानत पर बाहर आकर फिर से तस्करी का सिंडिकेट चलाने लगता था।
• मास्टरमाइंड: तकनीकी साक्ष्यों से साफ हुआ है कि मन्ना पर्दे के पीछे रहकर पूरे ड्रग नेटवर्क को संसाधन और निर्देश देता था।
नजरबंद किए गए अन्य तस्कर
1. अंकित ठाकुर (नीरथ): रामपुर क्षेत्र में चिट्टे की सप्लाई का मुख्य चेहरा।
2. गोविन्द सिंह (शाहधार): 30 वर्षीय यह तस्कर तीन बार पकड़ा जा चुका है, जिससे एक बार में ही 87.87 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ था।
3. लोकिंदर कंवर (कोटखाई): चरस और चिट्टे की तस्करी में संलिप्त, कोटखाई क्षेत्र का पुराना अपराधी।
क्यों पड़ी PIT NDPS की जरूरत?
सामान्य मामलों में तस्कर जमानत पाकर बाहर आ जाते हैं और फिर से युवाओं को नशे की गर्त में धकेलते हैं। Prevention of Illicit Traffic in NDPS Act पुलिस को वह शक्ति देता है जिसके तहत आदतन अपराधियों को अपराध करने से रोकने के लिए लंबी अवधि तक जेल में (बिना जमानत के) रखा जा सकता है।
हमारा लक्ष्य केवल नशा पकड़ना नहीं, बल्कि नशे के नेटवर्क को जड़ से उखाड़ना है। मनोज मन्ना जैसे अपराधी समाज के लिए खतरा हैं। शिमला पुलिस ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।” > — जिला पुलिस, शिमला




