
IBEX NEWS, शिमला
जनजातीय जिला चंबा के पांगी घाटी से एक बड़ी राजनैतिक खबर सामने आ रही है। जनजातीय सलाहकार परिषद (TAC) के सदस्य और किलाड़-1 के प्रधान सतीश शर्मा ने मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। यह इस्तीफा केवल एक पद का त्याग नहीं है, बल्कि सरकारी तंत्र में व्याप्त ‘सुस्ती’ और ‘भ्रष्टाचार’ के खिलाफ एक खुला विद्रोह नजर आ रहा है।

सतीश शर्मा ने अपने पत्र में उन मुद्दों को उठाया है जो पांगी घाटी की जनता के लिए नासूर बन चुके हैं:
सड़कों की बदहाली: उन्होंने आरोप लगाया कि शहीद दीनानाथ गेट से बाजार तक इंटरलॉक टाइल और सौंदर्यीकरण का जो प्रस्ताव उन्होंने रखा था, उसे नजरअंदाज किया गया। हालत यह है कि सड़क अब गड्ढों में तब्दील हो चुकी है।
कागजों पर ‘ब्लैक टॉपिंग’: पत्र में खुलासा किया गया है कि साल 2024-25 और 25-26 में एक ही सड़क पर बार-बार ‘ब्लैक टॉपिंग’ (तारकोल) का काम दिखाया गया, लेकिन वह सड़क कुछ ही महीनों में उखड़ गई। इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।
फर्नीचर खरीद में बड़ा घोटाला? मिनी सचिवालय के लिए ₹55 लाख के फर्नीचर की खरीद पर सवाल उठाए गए हैं। शर्मा का आरोप है कि नियमों के अनुसार ई-टेंडरिंग होनी चाहिए थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर मिलीभगत कर टेंडर बांटे गए।
अधिकारियों के खाली पद: पांगी लोक निर्माण विभाग में पिछले 3 साल से अधिशासी अभियंता (XEN) का पद खाली है। इसके अलावा आवासीय आयुक्त और खंड चिकित्सा अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पद खाली होने से विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं।
बजट वितरण में भेदभाव: आरोप है कि ‘मद मेजर 2515-00796’ के तहत कुछ चुनिंदा पंचायतों को ही बजट दिया जा रहा है, जबकि बाकी को उपेक्षित रखा गया है।
“अंतरात्मा की आवाज” पर लिया फैसला
सतीश शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब वह जनता के काम ही नहीं करवा पा रहे, तो इन समितियों में रहने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री के साथ-साथ जनजातीय विकास मंत्री और जिला अध्यक्ष कांग्रेस (चंबा) को भी भेज दिया है।




