
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को आईजीएमसी शिमला में थ्री टेस्ला एमआरआई मशीन का लोकार्पण किया।
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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने किया निरीक्षण, एआई तकनीक से और सटीक होगी जांच1
बेसिक एमआरआई स्कैन की दरें 3,000₹ से शुरू होती है ।
IBEX NEWS,शिमला
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने स्वास्थ्य मंत्री Dhani Ram Shandil के साथ Indira Gandhi Medical College (आईजीएमसी) का दौरा कर अस्पताल में हाल ही में स्थापित अत्याधुनिक 3-टेस्ला (3-Tesla) एमआरआई मशीन का शुभारंभ किया।
दौरे के दौरान रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुधा शर्मा ने बताया कि यह नई 3-टेस्ला एमआरआई मशीन अस्पताल के लिए एक बड़ा तकनीकी उन्नयन है। उन्होंने लीवर, पित्ताशय में पथरी तथा ब्रेन ट्यूमर की उच्च गुणवत्ता वाली इमेजें दिखाते हुए समझाया कि 3-टेस्ला तकनीक अधिक शक्तिशाली मैग्नेटिक फील्ड पर आधारित होती है, जिससे बेहद स्पष्ट और हाई-रिज़ॉल्यूशन स्कैन प्राप्त होते हैं।
उन्होंने बताया कि आईजीएमसी में पिछले लगभग 20 वर्षों से 1.5-टेस्ला एमआरआई मशीन कार्यरत थी। नई 3-टेस्ला मशीन न केवल कम समय में स्कैन पूरा करती है, बल्कि जटिल बीमारियों की शुरुआती अवस्था में पहचान करने में भी अधिक सक्षम है। इससे न्यूरोलॉजी, ऑन्कोलॉजी और गैस्ट्रो संबंधी रोगों के निदान में विशेष लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने चिकित्सकों और स्टाफ की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने घोषणा की कि जल्द ही एआई आधारित सॉफ्टवेयर भी जोड़ा जाएगा, जिससे इमेजिंग विश्लेषण और अधिक सटीक और प्रभावी हो सकेगा।

मुख्यमंत्री ने एमआरआई जांच की लागत के बारे में भी जानकारी ली और यह सुनिश्चित किया कि आम जनता को किफायती दरों पर सेवाएं मिलें। उन्हें बताया गया कि बेसिक एमआरआई स्कैन की दरें 3,000 रुपये से शुरू होती हैं।
नई 3-टेस्ला एमआरआई मशीन और आगामी एआई तकनीक के जुड़ने से आईजीएमसी की डायग्नोस्टिक क्षमताओं में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे प्रदेश के मरीजों को अन्य राज्यों में रेफर होने की आवश्यकता कम होगी और हिमाचल में ही विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

MRI मशीन कैसे काम करती है?
MRI का मतलब है Magnetic Resonance Imaging। यह शरीर के अंगों की विस्तृत तस्वीरें लेने के लिए शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों (Magnetic fields) और रेडियो तरंगों का उपयोग करता है।
• शक्तिशाली चुंबक: जब आप मशीन के अंदर होते हैं, तो मशीन का चुंबकीय क्षेत्र आपके शरीर के प्रोटॉन (Protons) को एक सीध में कर देता है।
• रेडियो तरंगें: मशीन रेडियो तरंगों का संचार करती है, जिससे ये प्रोटॉन अपनी जगह से हट जाते हैं।
• सिग्नल कैप्चर: जब रेडियो तरंगें बंद की जाती हैं, तो प्रोटॉन वापस अपनी जगह पर आते हैं और ऊर्जा छोड़ते हैं। कंप्यूटर इस ऊर्जा को पकड़कर विस्तृत तस्वीरें बनाता है।
AI और MRI का संगम
आजकल AI का उपयोग MRI स्कैन को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है:
1. तेज़ स्कैन: AI की मदद से MRI प्रक्रिया में लगने वाला समय 30-50% तक कम हो गया है।
2. सटीकता: AI सूक्ष्म विसंगतियों (जैसे ट्यूमर के शुरुआती लक्षण) को पहचानने में डॉक्टरों की मदद करता है।
3. शोर कम करना: AI इमेज की गुणवत्ता को साफ (Clear) करता है ताकि कम समय में बेहतर रिपोर्ट मिल सके।

1. High Tesla = High Resolution: जितना ज्यादा Tesla होगा, तस्वीर उतनी ही साफ होगी और स्कैन में उतना ही कम समय लगेगा।
2. धातु (Metal) से खतरा: इतनी शक्तिशाली मशीन के पास कोई भी लोहे या धातु की वस्तु (जैसे चाबी, पेसमेकर, या ऑक्सीजन सिलेंडर) ले जाना जानलेवा हो सकता है क्योंकि मशीन उसे गोली की रफ्तार से अपनी ओर खींच लेगी।
3. ध्वनि (Noise): जैसे-जैसे Tesla बढ़ता है, मशीन की आवाज़ (Thumping noise) भी बढ़ती जाती है।




