
IBEX NEWS BUREAU,शिमला
टांडा मेडिकल कॉलेज में दिल के मरीजों की ‘नो एंट्री’? प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान, डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सालय (आरपीजीएमसी) टांडा के हृदय रोग विभाग (Cardiology Department) को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। सुक्खू सरकार के ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के दावों के बीच, टांडा मेडिकल कॉलेज में कार्यरत इकलौते क्रियाशील हृदय रोग विशेषज्ञ (कार्डियोलॉजिस्ट) डॉ. मुकुल कुमार का तबादला शिमला कर दिया गया है।
सरकार के इस फैसले पर भरमौर के विधायक और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जनक राज ने गहरी चिंता जताते हुए सरकार की नीति और नीयत दोनों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
हाल ही में सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, टांडा मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और एचओडी डॉ. मुकुल कुमार को तत्काल प्रभाव से ‘ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी’ (OSD) बनाकर शिक्षा निदेशालय, कसुम्पटी (शिमला) भेज दिया गया है।

इस तबादले के बाद अब टांडा मेडिकल कॉलेज का हृदय रोग विभाग पूरी तरह से विशेषज्ञ विहीन होने की कगार पर पहुंच गया है। याद रहे कि टांडा मेडिकल कॉलेज पर न केवल कांगड़ा, बल्कि चंबा, हमीरपुर, ऊना और मंडी जिलों के लाखों मरीजों के इलाज का जिम्मा है।भरमौर के विधायक डॉ. जनक राज ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि पहले से ही स्टाफ और विशेषज्ञों की कमी से जूझ रहे टांडा मेडिकल कॉलेज के सुपर-स्पेशियलिटी विभागों को और ज्यादा कमजोर करना सरकार की कौन सी व्यवस्था है? उन्होंने सरकार से सीधे तौर पर निम्नलिखित सवाल पूछे हैं:
मरीजों की जान से खिलवाड़ क्यों? जब विभाग में एकमात्र ही क्रियाशील हृदय रोग विशेषज्ञ सेवाएं दे रहे थे, तो जनहित को ताक पर रखकर उनका तबादला प्रशासनिक काम (OSD) के लिए शिमला क्यों किया गया?
अब गरीब मरीज कहाँ जाएंगे? गंभीर दिल की बीमारियों से जूझ रहे जो गरीब मरीज निजी अस्पतालों का खर्च नहीं उठा सकते, वे अब अपनी एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर जैसी इमरजेंसी सुविधाओं के लिए कहाँ भटकेंगे?
क्या यही है ‘व्यवस्था परिवर्तन‘? दावों और वादों से उलट धरातल पर स्वास्थ्य सेवाओं का यह हाल है कि चलते-चलते विभागों को बंद होने की नौबत पर ला दिया गया है।विधायक डॉ. जनक राज ने सरकार से आग्रह किया है कि वह इस बेहद गंभीर स्थिति पर तुरंत अपनी स्थिति स्पष्ट करे। उन्होंने मांग की है कि इस जनविरोधी फैसले की समीक्षा की जाए और टांडा के हृदय रोग विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों की पर्याप्त और परमानेंट नियुक्ति तुरंत सुनिश्चित की जाए, ताकि दूर-दराज के इलाकों से आने वाले गरीब मरीजों को मौत के मुंह में धकेलने से बचाया जा सके।




