
IBEX NEWS BUREAU,शिमला
क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में एक प्रसूता की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु के बाद उपजे जनाक्रोश और प्रशासनिक कार्रवाई पर मेडिकल काउंसिल ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ‘स्टेट एसोसिएशन ऑफ मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज टीचर्स’ (SAMDCOT) ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे एक अत्यंत दुर्लभ और घातक मेडिकल इमरजेंसी का मामला बताया है। एसोसिएशन ने साफ शब्दों में कहा है कि बिना किसी वैज्ञानिक साक्ष्य और विशेषज्ञ जांच के, केवल सार्वजनिक दबाव में आकर डॉक्टर को निलंबित करना ‘प्राकृतिक न्याय’ के सिद्धांतों की सरेआम धज्जियां उड़ाना है।
चिकित्सीय तथ्यों और उपलब्ध केस हिस्ट्री को रेखांकित करते हुए SAMDCOT के अध्यक्ष डॉ. बलबीर सिंह वर्मा और महासचिव डॉ. पीयूष कपिला (IGMC शिमला) ने स्पष्ट किया कि यह मामला एम्नियोटिकफ्लूइडएम्बोलिज़्म (Amniotic Fluid Embolism – AFE) का प्रतीत होता है।
चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) के अनुसार ये अत्यंतदुर्लभऔरअचानक: AFE प्रसूति (Obstetrics) के दौरान होने वाली एक ऐसी अचानक और अत्यंत दुर्लभ जटिलता है, जिसकी पहले से भविष्यवाणी करना लगभग असंभव है।

मरीजऔरतीमारदारोंसेदुर्व्यवहारकाआरोप: आदेश के अनुसार, 21 जून 2026 को अस्पताल में हुई प्रसूता की मौत (Maternal Death) के बाद सार्वजनिक शिकायत मिली थी, जिसमें ड्यूटी पर तैनात नर्स द्वारा मरीजों और उनके तीमारदारों के साथ अनुचित व्यवहार, गंभीर कदाचार (Grave Misconduct) और खराब संचार (Unsatisfactory Communication) करने के आरोप लगाए गए हैं।
विभागीयजांचशुरू: नर्स के खिलाफ केंद्रीय सिविल सेवा—CCS (CCA) नियमों के तहत औपचारिक विभागीय जांच (Enquiry) शुरू करने की तैयारी कर ली गई है।
मुख्यालयबदलागया: निलंबन अवधि के दौरान उक्त स्टाफ नर्स का मुख्यालय बदलकर दीन दयाल उपाध्याय जोनल अस्पताल (DDUZH) शिमला तय किया गया है, और वे बिना अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगी।
आधिकारिकआदेशजारी: यह निलंबन आदेश स्वास्थ्य सेवा निदेशक (Director Health Services), हिमाचल प्रदेश द्वारा 1 जुलाई 2026 को जारी किया गया है।



उच्चमृत्यु–दर (High Mortality Rate): इस स्थिति में एम्नियोटिक फ्लूइड (गर्भस्थ शिशु के चारों ओर का तरल पदार्थ) माँ के रक्तप्रवाह में प्रवेश कर जाता है, जिससे फेफड़े और दिल अचानक काम करना बंद कर देते हैं। इसमें दुनिया की सर्वोत्तम चिकित्सा मिलने के पोस्टमार्टमसेपरिजनोंकाइंकार, फिरलापरवाहीकाआरोपक्यों?
एसोसिएशन ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि घटना के तुरंत बाद ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों ने मौत के वास्तविक कारणों की वैज्ञानिक और निष्पक्ष पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम (Post-Mortem) कराने का लिखित आग्रह किया था। परंतु, परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से साफ इंकार कर दिया। SAMDCOT का तर्क है कि जब मौत की वैज्ञानिक पुष्टि के मुख्य साक्ष्य को ही खारिज कर दिया गया, तो बिना किसी विशेषज्ञ जांच के सीधे डॉक्टरों पर लापरवाही का ठीकरा फोड़ना कहां तक न्यायसंगत है?
निलंबन आदेश तुरंत वापस हो, डॉक्टर अपराधी नहीं’: SAMDCOT
SAMDCOT ने सरकार और प्रशासन से दो टूक मांग की है कि संबंधित चिकित्सक का निलंबन (Suspension) तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। संगठन ने सुझाव दिया है कि यदि प्रशासन को लगता है कि निष्पक्ष जांच के लिए डॉक्टर का वहां न रहना जरूरी है, तो उन्हें प्रशासनिकअवकाश (Administrative Leave) पर भेजा जा सकता है, न कि एक अपराधी की तरह सीधे निलंबित किया जाए। मात्र जनदबाव में की गई यह दंडात्मक कार्रवाई डॉक्टरों का मनोबल पूरी तरह तोड़ देती है, जिसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा।
अस्पतालों के घेराव और राजनीतिकरण पर गहरी चिंता
एसोसिएशन ने अस्पतालों में बढ़ती ‘भीड़तंत्र’ की संस्कृति पर तीखी चिंता व्यक्त की है। प्रेस विज्ञप्ति के जरिए चेतावनी देते हुए कहा गया है कि किसी भी अप्रिय घटना के बाद अस्पतालों को घेरना और डॉक्टरों के खिलाफ भीड़ इकट्ठा करना एक खतरनाक ट्रेंड बन चुका है, जिससे अस्पताल में दाखिल अन्य गंभीर मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है। संवेदनशील मामलों का राजनीतिकरण: ऐसे विरोध प्रदर्शनों में अक्सर कुछ बाहरी संगठन या राजनीतिक तत्व अपने हितों के लिए सक्रिय हो जाते हैं, जिससे पूरा मामला चिकित्सकीय तथ्यों से भटककर राजनीतिक रंग ले लेता है।
संघ ने कहा है कि हमारा स्टैंडस्पष्टहै—हमकिसीदोषीकोबचानानहींचाहते।यदिविशेषज्ञजांचमेंचिकित्सकीयलापरवाही (Medical Negligence) साबितहोतीहै, तोनियमानुसारकार्रवाईअवश्यहो।लेकिनन्यायकाआधारवैज्ञानिकसाक्ष्यहोनेचाहिए, नकिसड़कपरजुटीभीड़कादबाव।हमसमाजसेभीअपीलकरतेहैंकिवेअफवाहोंसेबचेंऔरन्यायिकप्रक्रियापरभरोसारखें।
— डॉ. बलबीरसिंहवर्मा (अध्यक्ष) एवंडॉ. पीयूषकपिला (महासचिव), SAMDCOT


