अभाव (Want of Indigency) के आधार पर रिजेक्ट हुए केसों की दोबारा होगी समीक्षा; सीधी भर्ती के कोटे में 5% की सीमा पर मिलेगी ढील, अंतिम मंजूरी मुख्यमंत्री देंगे।
शिमला:
हिमाचल प्रदेश में सरकारी सेवा के दौरान दम तोड़ने वाले कर्मचारियों के आश्रितों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी राहत भरी खबर जारी की है. प्रदेश सरकार के वित्त विभाग (व्यय नियंत्रण – II) ने 1 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) जारी करते हुए पूर्व में खारिज हो चुके करुणामूलक रोजगार (Compassionate Employment) के मामलों पर “वनटाइममेजर” (एकमुश्तउपाय) के तहत दोबारा विचार करने का फैसला किया है.
सरकार के इस कदम से उन सैकड़ों प्रभावित परिवारों को बड़ी उम्मीद जगी है, जिनके आवेदन पूर्व में सिर्फ इसलिए निरस्त कर दिए गए थे क्योंकि उस समय वे पात्रता के लिए निर्धारित वित्तीय/गरीबी के कड़े मानदंडों (Indigency) को पूरा नहीं कर पा रहे थे.
31 दिसंबर 2026 तक करना होगा आवेदन, 6 महीने की समय सीमा तय
सरकारी आदेश (Fin-F-(F)-1-1/2025) के मुताबिक, जिन आश्रितों के केस केवल ‘अभाव या गैर-कंगाली’ (Want of Indigency) के आधार पर खारिज हुए थे, वे अपने संबंधित विभागाध्यक्षों (Heads of Departments) के समक्ष 31 दिसंबर 2026 तक पुनर्विचार के लिए नया आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं.
आवेदन मिलने के एक महीने के भीतर विभागाध्यक्ष को इस पर निर्णय लेना होगा।
तय समय सीमा बीत जाने के बाद किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।
नियमों में ढील: 5% की सीलिंग से मिलेगी राहत
आदेश के अनुसार, इस विशेष छूट के तहत योग्य पाए जाने वाले क्लास-III [Job Trainee Junior Office Assistant (IT)] पदों के मामलों में कार्मिक विभाग के भर्ती निदेशालय के माध्यम से सीधी भर्ती कोटा पदों पर 5% कीअधिकतमसीमा (Ceiling) मेंढील दी जाएगी। वहीं, क्लास-IV और एमटीडब्ल्यू (MTW) पदों को पूरी तरह से सरकार की ‘Common MTW Policy’ के तहत भरा जाएगा।सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल वही करुणामूलक मामले दोबारा जांचे जाएंगे जो पहले विशेष रूप से ‘आर्थिकतंगहालीकीकमी‘ (Want of Indigency) के आधार पर रिजेक्ट हुए थे। किसी अन्य तकनीकी या कानूनी आधार पर खारिज किए गए मामलों को इस वन-टाइम व्यवस्था के तहत दोबारा नहीं खोला जाएगा।पूरी छानबीन के बाद, यदि कोई मामला करुणामूलक रोजगार के लिए सभी पैमानों पर फिट पाया जाता है, तो संबंधित विभाग द्वारा आश्रित को औपचारिक नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) जारी करने से पहले मुख्यमंत्रीकीअंतिममंजूरी लेना अनिवार्य होगा।
वित्त विभाग के अवर सचिव (Under Secretary Finance) राजेश गौतम द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश को राज्य के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, राज्यपाल के सचिव, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल और सभी सार्वजनिक उपक्रमों/बोर्डों को तत्काल प्रभाव से कड़ाई से लागू करने के लिए भेज दिया गया है।
नोट: विस्तृतजानकारीऔरदिशानिर्देशोंकेलिएआधिकारिकहिमाचलसरकारकीवेबसाइट (www.himachal.nic.in/finance) पर ‘Expenditure’ लिंककेअंतर्गतभीउपलब्धहै।



