
हाइड्रो प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बनी निधि को अनाथ बच्चों की सहायता में लगाने वाली दोनों अधिसूचनाएं हाईकोर्ट ने की स्थगित
IBEX NEWS BUREAU,शिमला |
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हाइड्रो परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्रों के लोकल एरिया डेवलपमेंट फंड (LADF) के इस्तेमाल को लेकर राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने 23 सितंबर 2025 और 18 मार्च 2026 की उन अधिसूचनाओं के संचालन पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिनके जरिए LADF का हिस्सा अनाथ बच्चों की वित्तीय सहायता के लिए निर्धारित किया गया था।




CWPIL No. 64/2026 (Janak Raj vs State of H.P. & Others) की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि स्वर्ण जयंती ऊर्जा नीति-2021 के तहत LADF का उद्देश्य केवल जलविद्युत परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्रों का विकास, स्थानीय समुदायों का पुनर्वास और आधारभूत ढांचे को मजबूत करना है। इस फंड का उपयोग केवल पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर की सार्वजनिक परिसंपत्तियों और विकास कार्यों पर किया जा सकता है।
याचिका में कहा गया कि सरकार ने 23 सितंबर 2025 की अधिसूचना से LADF का 10 प्रतिशत हिस्सा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के माध्यम से अनाथ बच्चों की सहायता के लिए आरक्षित किया और 18 मार्च 2026 को इसे बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया। याचिकाकर्ता का तर्क था कि सरकार को स्थानीय विकास के लिए निर्धारित इस फंड को उसके मूल उद्देश्य से हटाकर अन्य योजनाओं में स्थानांतरित करने का अधिकार नहीं है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी माना कि अधिसूचनाओं में कहीं यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह राशि केवल उन्हीं हाइड्रो प्रभावित क्षेत्रों के अनाथ बच्चों पर खर्च होगी, जहां से LADF प्राप्त होता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने दोनों अधिसूचनाओं के संचालन पर अगली सुनवाई तक स्टे लगा दिया।

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में दलील दी कि स्वर्ण जयंती ऊर्जा नीति-2021 के तहत बनाया गया लोकल एरिया डेवलपमेंट फंड (LADF) केवल जलविद्युत परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए है। इस फंड का उद्देश्य स्थानीय समुदायों को परियोजनाओं का लाभ पहुंचाना, बुनियादी सुविधाएं विकसित करना और परियोजनाओं के प्रभावों का स्थानीय स्तर पर समाधान करना है।
नीति के अनुसार 5 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली परियोजनाओं में कुल लागत का 1.5 प्रतिशत तथा 5 मेगावाट तक की परियोजनाओं में 1 प्रतिशत राशि LADF में जमा करना अनिवार्य है। इसके अलावा केंद्र सरकार की हाइड्रो पावर नीति-2008 के तहत उत्पादित बिजली से मिलने वाले राजस्व का 1 प्रतिशत वार्षिक भी स्थानीय विकास के लिए निर्धारित किया गया है।
याचिका में कहा गया कि क्लॉज 5.9.3 के तहत LADF का उपयोग केवल सार्वजनिक विकास कार्यों—जैसे सड़क, पेयजल, सिंचाई, स्कूल, पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, अस्पताल, खेल मैदान, बस अड्डा और अन्य जनहित की आधारभूत सुविधाओं—पर ही किया जा सकता है। वहीं क्लॉज 5.10 स्पष्ट रूप से कहता है कि इस निधि का उपयोग कच्चे रास्तों, वाहनों की खरीद, निजी मकानों की मरम्मत, वेतन-भत्तों, कर्मचारियों की नियुक्ति या किसी व्यक्ति को आर्थिक सहायता देने जैसे कार्यों पर नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन प्रावधानों के बावजूद राज्य सरकार ने 23 सितंबर 2025 की अधिसूचना के माध्यम से LADF का 10 प्रतिशत हिस्सा और बाद में 18 मार्च 2026 की अधिसूचना के जरिए इसे बढ़ाकर 40 प्रतिशत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के माध्यम से अनाथ बच्चों की सहायता के लिए निर्धारित कर दिया। याचिका में इसे नीति के मूल उद्देश्य और LADF के नियमों के विपरीत बताते हुए चुनौती दी गई है।
अदालत ने मामले को CWPIL No. 76/2026 के साथ सूचीबद्ध करने के निर्देश भी दिए हैं।


