
IBEX NEWS BUREAU,शिमला
किन्नौर वन मंडल ने अवैध दयार (कैल/देवदार) स्लीपर बरामदगी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ख्वांगी स्थित एम/एस वाइल्ड ग्रीन इम्पोर्टेड टिम्बर सेल डिपो का पंजीकरण/लाइसेंस तत्काल प्रभाव से अंतरिम (Interim) रूप से निलंबित कर दिया है। विभागीय जांच पूरी होने तक डिपो की सभी व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है।
18 जुलाई 2026 को जारी कार्यालय आदेश के अनुसार, 5 जुलाई 2026 को डिपो परिसर के बाहर से 39 कैल (दयार) टिम्बर स्लीपर, जिनका कुल आयतन 1.003 घन मीटर था, बरामद किए गए। वन विभाग के अनुसार इन स्लीपरों पर वैध सरकारी हैमर मार्क, पंजीकृत प्रॉपर्टी मार्क तथा ट्रांजिट पास नहीं पाया गया। इसके बाद भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 52 के तहत लकड़ी को जब्त कर लिया गया।
विभाग ने प्रारंभिक जांच में भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धाराओं 41, 42 एवं 52, हिमाचल प्रदेश फॉरेस्ट प्रोड्यूस ट्रांजिट (लैंड रूट्स) नियम, 2013 तथा टिम्बर डिपो पंजीकरण की शर्तों के उल्लंघन के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने की बात कही है।
कार्यालय आदेश में कहा गया है कि डिपो संचालक को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका था, लेकिन लाइसेंसधारी की ओर से दिया गया जवाब प्रथम दृष्टया असंतोषजनक पाया गया। इसके चलते विभाग ने टिम्बर डिपो का लाइसेंस अंतरिम रूप से निलंबित करने का निर्णय लिया।


इस बीच पूर्व जिला परिषद सदस्य हितेश नेगी ने आरोप लगाया है कि जब्त किए गए स्लीपरों पर वैध टीडी (TD) हैमर मार्क नहीं था और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच होनी चाहिए। कुछ स्थानीय लोगों ने भी टिम्बर डिपो के संचालन को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।




उधर, डीसीएफ अरविंद कुमार (IFS) ने कहा कि यदि लकड़ी टीडी योजना के तहत वैध रूप से प्राप्त होती तो उस पर सरकारी हैमर मार्क होना अनिवार्य था। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की विस्तृत विभागीय जांच जारी है और अंतिम कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।

