
शिक्षा विभाग को लंबे समय से शिक्षक द्वारा जाति प्रमाण पत्र में गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही थीं। मामले की गहन जांच के लिए समिति गठित की गई थी, जिसमें यह स्पष्ट हो गया कि संबंधित शिक्षक ने फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर नौकरी हासिल की थी। दस्तावेजों की पुष्टि के दौरान यह प्रमाण पत्र अवैध पाया गया। जांच पूरी होने के बाद विभाग ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए शिक्षक की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया। शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने स्पष्ट किया कि विभाग में इस प्रकार की धोखाधड़ी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में विभाग जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए सख्त कार्रवाई करेगा ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति गलत तरीके से आरक्षण का लाभ न उठा सके। जानिए क्या है पूरा मामला.
IBEX NEWS,शिमला
शिक्षा विभाग ने जिला शिमला के जीएसएसएस देइया के टीजीटी (आर्ट्स) शिक्षक को फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करके अनुसूचित जाति श्रेणी कोटे का लाभ अवैध रूप से प्राप्त करने पर टर्मिनेट किया है। विभाग के निदेशक आशीष कोहली की ओर से यह आदेश जारी हुए हैं। जानकारी के अनुसार अनुसूचित जाति बेरोजगार संघ, हिमाचल प्रदेश की ओर से सचिव (शिक्षा) कार्यालय को इसकी शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उक्त अध्यापक को विभाग द्वारा टीजीटी (कला) के रूप में कार्यालय आदेशों के अनुसार 18.02.2009 के तहत नियुक्त किया गया था, जो बैचवाइज आधार पर अनुसूचित जाति (आईआरडीपी) के लिए आरक्षित पद के विरुद्ध क्रम संख्या 25 पर उपस्थित हुआ था, जबकि वह अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित नहीं है।
इस दौरान पुलिस स्टेशन नेरवा में भी इस मामले पर एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सामान्य जाति का सदस्य होने के नाते, उन्होंने इस विभाग में टीजीटी (कला) के रूप में नौकरी पाने के लिए वर्ष 2009 में फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। इसके बाद नियुक्ति आदेश की जांच की गई है और यह पाया गया है कि शिक्षक को अनुबंध के आधार पर टीजीटी (कला) के रूप में नियुक्त किया गया था।




