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पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक को लेकर बुधवार सुबह 10:30 बजे तीन अफसर मीडिया को ब्रीफ करने आए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे पहले एयर स्ट्राइक का 2 मिनट का वीडियो प्ले किया गया। इसमें आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना की कार्रवाई दिखाई गई।इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने के लिए कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह मौजूद थीं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में संसद हमले, मुंबई हमले, पुलवामा हमले और पहलगाम हमले के दृश्य दिखाए गए। सबसे पहले विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इसके बाद कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पूरी जानकारी साझा की। उन्होंने बतायास कि ऑपरेशन सिंदूर 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए वीभत्स आतंकी हमले के शिकार नागरिकों और उनके परिवारों को न्याय देने के लिए किया गया। नौ ठिकानों की पहचान कर उन्हें बर्बाद किया गया। इन ठिकानों में आतंकियों को प्रशिक्षित किया जाता था। ये आतंकियों के लॉन्च पैड थे। ऑपरेशन सिंदूर के लिए इन लक्ष्यों का चयन विश्वसनीय खुफिया सूचनाओं के आधार पर हुआ। इसमें यह ध्यान रखा गया कि रिहाइशी इलाकों और आम नागरिकों को नुकसान न पहुंचे।

पहलगाम हमला आतंकवाद को अंजाम देने के पाकिस्तान के लंबे ट्रैक रिकॉर्ड से जुड़ा’
उन्होंने आगे कहा, ‘पहलगाम हमला भारत में सीमा पार आतंकवाद को अंजाम देने के पाकिस्तान के लंबे ट्रैक रिकॉर्ड से जुड़ा है। पाकिस्तान दुनियाभर में आतंकियों की शरणस्थली के रूप में पहचान बना चुका है। वहां आतंकी सजा पाने से बचे रहते हैं। साजिद मीर को पाकिस्तान ने मृत घोषित कर दिया था, अंतरराष्ट्रीय दबाव में वह जीवित पाया गया, इससे स्पष्ट उदाहरण मिलता है। पहलगाम हमले के बाद भारत के सभी राज्यों में आक्रोश देखा गया। यह आवश्यक समझा गया कि हमले के आरोपियों और योजनाकारों को न्याय के कटघरे में लाया जाए। पाकिस्तान ने कार्रवाई करने के लिए कोई स्पष्ट कदम नहीं उठाया। भारत के विरूद्ध आगे भी हमले होने का खतरा है, इसलिए इससे निपटना आवश्यक समझा गया।’

भारत ने इसे ‘आपरेशन सिंदूर’ नाम दिया। भारत ने बहावलपुर में मसूद अजहर के ठिकाने सहित नौ आतंकी ठिकानों पर बमबारी की।
भारतीय सेना ने साफ कहा कि हमारी कार्रवाई सिर्फ आतंकी ठिकानों पर की गई है। किसी भी पाकिस्तानी सैन्य शिविरों को निशाना नहीं बनाया गया है। भारतीय सेना ने एक्स पर लिखा- न्याय हुआ, जय हिंद। उसके बाद बौखलाए पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ-राजौरी में गोलीबारी की है।

18 दिसंबर 2004 को भारतीय वायुसेना में कमीशन हुईं विंग कमांडर व्योमिका सिंह को मौजूदा वक्त की सबसे बेहतरीन विंग कमांडर में से एक माना जाता है। जिनके पास लड़ाकू हेलिकॉप्टर्स उड़ाने का एक बेहतरीन अनुभव है और चीता, चेतक जैसे लड़ाकू हेलिकॉप्टर उड़ाने में महारथ भी हासिल है। व्योमिका सिंह को वायुसेना में शामिल होने के 13 साल बाद विंग कमांडर का पद मिला और 18 दिसंबर 2017 में जाकर वो विंग कमांडर बनीं।
सोफिया कुरैशी
35 साल की सोफिया कुरैशी इस वक्त पहली महिला ऑफिसर हैं, जिन्होंने इंडियन आर्मी के पूरे कॉन्टिजेंट को एक कई देशों की सैन्य एक्सरसाइज़ में लीड किया है। साल 2016 में वो एक्सरसाइज़ फोर्स 18 मिलिट्री ड्रिल का हिस्सा बन चुकी हैं और उसे लीड भी कर चुकी हैं. सिर्फ इतना ही नहीं, गुजरात से आने वाली सोफिया कुरैशी सैन्य परिवार से ही आती हैं और बायोकेमेस्ट्री में डिग्री भी रखती हैं। करीब 6 साल के लिए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन में भारत की तरफ से योगदान दिया है और कोंगो में मिशन को पूरा किया है।
‘भारत ने सीमा पार हमलों को रोकने और उनका प्रतिरोध करने के अपने अधिकार का प्रयोग किया’
विदेश सचिव ने कहा कि आज सुबह भारत ने सीमा पार हमलों को रोकने और उनका प्रतिरोध करने के अपने अधिकार का प्रयोग किया। यह कार्रवाई नपी-तुली और बिना उकसावे वाली रही। यह भारत भेजे जाने वाले आतंकियों को अक्षम बनाने पर केंद्रित है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रेस वक्तव्य जारी कर आतंक के प्रायोजितों को न्याय के कटघरे में लाने पर जोर दिया गया था। भारत की कार्रवाई को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
‘भारत ने आतंकी हमलों को रोकने के अपने अधिकार का प्रयोग किया’
इससे पहले विक्रम मिस्री ने कहा, ’22 अप्रैल 2025 को लश्कर-ए-तैयबा से पाकिस्तान से प्रशिक्षित आतंकियों ने कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर बर्बरतापूर्ण हमला किया। 25 भारतीयों और एक विदेशी नागरिक को कायरतापूर्ण तरीके से मार दिया गया। यह मुंबई हमले के बाद आतंकी हमलों में आम नागरिकों के मारे जाने की सबसे गंभीर घटना रही। इस हमले में वहां मौजूद लोगों को करीब से और उनके परिवार के सामने सिर पर गोली मारी गई। परिवार के सदस्यों को जानबूझकर आघात पहुंचाया गया। यह नसीहत भी दी गई कि वे हमले का संदेश पहुंचाएं। यह जम्मू-कश्मीर में बहाल हो रही सामान्य स्थिति को बाधित करने के लिए हुआ। इस हमले का उद्देश्य पर्यटन को प्रतिकूल रूप से नुकसान पहुंचाना था। पिछले साल यहां पौने करोड़ पर्यटक आए थे। आतंकियों का यह मकसद था कि इस इलाके को पिछड़ा रखा जाए। हमले का यह तरीका जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों में साम्प्रदायिक दंगे भड़काने के उद्देश्य से भी था। हमने प्रयासों को विफल कर दिया। एक समूह ने खुद को रजिस्टेंस फ्रंट कहते हुए हमले की जिम्मेदारी ली है। यह प्रतिबंधित समूह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के समक्ष रिपोर्ट में इस संगठन के बारे में इनपुट दिए थे। इससे पाकिस्तान के आतंकी समूहों के मुखौटे के रूप में टीआरएफ की भूमिका सामने आई थी।’




