
अब यह मामला न्यू शिमला पुलिस थाना से CBI दिल्ली को ट्रांसफर कर दिया गया ।
IBEX NEWS,शिमला ।
हिमाचल प्रदेश में चीफ इंजीनियर विमल नेगी मौत मामले में CBI ने दिल्ली में FIR कर दी है। हाईकोर्ट के आदेशों पर अब यह मामला न्यू शिमला पुलिस थाना से सेंट्रल ब्यूरो आफ़ इन्वेस्टिगेशन दिल्ली को ट्रांसफर कर दिया गया है।FIR दर्ज होने के बाद अब इस मामले में जाँच शुरू हो गई है । एचपीसीएल के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की रहस्यमयी मौत पर उच्चन्यालय के आदेशों की जजमेंट मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता पैनल ने स्पीड पोस्ट के ज़रिए गृह मंत्रालय को भेजी थी और दिल्ली में मंगलवार शाम दर्ज हुई है ।क्योंकि चंडीगढ़ में CBI ऑफिस में हिमाचल कैडर के ऑफिसर हैं हाईकोर्ट के आदेशों की तोहिन न हो इसलिए दिल्ली में CBI ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 108 और 3(5) के तहत केस दर्ज किया है। BNS की धारा 108 आत्महत्या के लिए उकसाने पर बनती है। इसमें यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है और जो कोई भी उसे ऐसा करने के लिए मजबूर करता है, तो उसे 10 साल तक के कारावास और जुर्माने से दंडित किए जाने का प्रावधान है।BNS की धारा 3(5) में उन मामलों में लागू होती है। जहां एक ही इरादे से कई व्यक्तियों द्वारा अपराध किया जाता है। यह प्रावधान बताता है कि ऐसे अपराध में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को अपराध के लिए जिम्मेदार माना जाएगा, जैसे कि उन्होंने इसे अकेले किया।हिमाचल हाईकोर्ट ने 23 मई को यह मामला CBI को सौंपने के आदेश दिए। जस्टिस अजय मोहन गोयल ने अपने आदेशों में कहा कि इस केस की जांच करने वाली एसआईटी में हिमाचल कैडर के पुलिस ऑफिसर नहीं होंगे।







गौर हो कि न्यू शिमला थाना में 19 मार्च को विमल नेगी की पत्नी किरण नेगी की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। इसकी जांच शिमला पुलिस की एसआईटी कर रही थी। परिजनों को टी पुलिस जांच पर भरोसा नहीं था। इसके बाद किरण नेगी ने हिमाचल हाईकोर्ट में याचिका दायर की और इस मामले की जांच CBI को देने की अपील की।
सीबीआई ने मामला दर्ज कर डीएसपी CBI ब्रिजेंद्र प्रसाद सिंह, इंसपेक्टर प्रदीप कुमार और सब इंसपेक्टर नीलेश सिंह CBI को इस केस की जांच सौंपी है।

इस बीच, विमल नेगी की पत्नी किरण नेगी ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले को सीबीआई को सौंपने के हाईकोर्ट के आदेश का तुरंत अनुपालन करने का अनुरोध किया।
किरण नेगी ने 23 मई को लिखे पत्र में कहा था, मेरे संज्ञान में आया कि स्पष्ट निर्देश के बावजूद राज्य सरकार ने मामले को सीबीआई को सौंपने के लिए अब तक आवश्यक कदम नहीं उठाए हैं।




