
हिमालय का रहस्य उजागर — शिमला और पटियाला के वैज्ञानिकों ने खोजीं तीन नई ‘रॉक एंट’ प्रजातिया
IBEX NEWS,शिमला
वैज्ञानिकों ने भारत से शैल चींटी (Rock Ant) की तीन नई प्रजातियाँ खोजीं
हिमालयी क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता ने एक बार फिर अपने भीतर छिपा एक रोचक रहस्य उजागर किया है। भारत के समर्पित मायर्मेकोलॉजिस्ट (चींटियों के वैज्ञानिक) — डॉ. जोगिन्दर रील्टा, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के जैव-विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर, तथा प्रोफेसर हिमेंदर भारती, पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला — की टीम ने शैल चींटी (Rock Ant) की तीन नई प्रजातियों की खोज की है।
मायर्मेकोलॉजिस्ट वे वैज्ञानिक होते हैं जो चींटियों का अध्ययन करते हैं। यह कीट-विज्ञान (Entomology) की एक शाखा है, जो चींटियों के सामाजिक व्यवहार, पारिस्थितिकी (Ecology) तथा पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में उनकी भूमिका से संबंधित होती है।
डॉ. जोगिन्दर रील्टा, सहायक प्रोफेसर, जैव-विज्ञान विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला, वर्ष 2012 से भारत के “Ant Man” कहे जाने वाले प्रो. हिमेंदर भारती के साथ चींटी वर्गीकरण (Taxonomy) के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। यह हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला तथा पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के लिए अत्यंत गर्व का विषय है कि इन वैज्ञानिकों ने ऐसी तीन नई शैल चींटी प्रजातियों की खोज की है जो अब तक विज्ञान के लिए अज्ञात थीं।
ये नई प्रजातियाँ अरुणाचल प्रदेश राज्य से खोजी गई हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि
Temnothorax arunachalensis का नाम इसकी टाइप स्थानीयता (type locality) अरुणाचल प्रदेश के नाम पर रखा गया है,
Temnothorax boltoni का नाम बैरी बोल्टन (Barry Bolton) के सम्मान में रखा गया है, जो चींटी वर्गीकरण, तंत्र-विज्ञान (systematics) और टैक्सोनॉमी (taxonomy) के क्षेत्र के अग्रणी वैज्ञानिक हैं।
वहीं Temnothorax pangchenensis हमारे ग्रह के संरक्षण (conservation) के मूल्य का प्रतीक है। “पांगचेन” शब्द मोनपा जनजाति की भाषा में “पापों से मुक्त” (free from all sins) का अर्थ रखता है। यह मोनपा जनजाति, जो इस क्षेत्र में निवास करती है, वहाँ की जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
यह चींटी वंश Temnothorax वर्तमान में विश्वभर में 505 प्रजातियों द्वारा प्रतिनिधित्व करता है, जबकि भारत में अब इसकी 15 प्रजातियाँ और एक उप-प्रजाति (subspecies) ज्ञात हैं। यह खोज Sociobiology नामक शोध पत्रिका में प्रकाशित की गई है।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने डॉ. जोगिन्दर रील्टा को उनकी इस पहली महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न केवल डॉ. रील्टा के व्यक्तिगत समर्पण और परिश्रम का परिणाम है, बल्कि यह हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के लिए भी गर्व का क्षण है। कुलपति प्रो. सिंह ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में यह युवा वैज्ञानिक नई खोजों, नवाचारों और अनुसंधान के क्षेत्र में विश्वविद्यालय को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाएंगे, जिससे विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा और अधिक बढ़ेगी।




