
हाईकोर्ट में CBI की रिपोर्ट में बड़े आरोप पेखूबेला प्रोजेक्ट में देरी, दबाव और ‘अनियमित भुगतान’ हुए ,बताया है कि समापन प्रमाण पत्र अधूरे काम पर जारी, ₹16.29 करोड़ भुगतान पर ऑडिट ने उठाए सवाल; मानसिक उत्पीड़न से अधिकारी की हालत बिगड़ने के भी आरोप।
IBEX NEWS,शिमला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सीबीआई ने स्टेटस रिपोर्ट दायर कर हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के पूर्व प्रबंध निदेशक हरिकेश मीणा की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया है।उच्च न्यायालय ने आगामी 3दिसम्बर को मामला कन्सिडरैशन के लिए रखा है और सीबीआई के इन्वेस्टीगेशन ऑफिसर को तलब किया है।ऐसे में जब आज दाखिल की अपनी रिपोर्ट में सीबीआई ने आरोप लगाया है कि मीणा ने अपने पद का दुरुपयोग कर एक ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।स्टेटस रिपोर्ट में सीबीआई के अनुसार, मीणा ने 32 मेगावाट के पेखूबेला सोलर पावर प्रोजेक्ट के लिए एक ठेकेदार को 220 करोड़ रुपये का अनुबंध दिया था, जिसे समय पर पूरा नहीं किया गया। इसके बावजूद, मीणा ने ठेकेदार को 10% भुगतान जारी करने का आदेश दिया, जिससे सरकारी खजाने को 12.73 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया है कि मीणा ने अधिकारी विमल नेगी को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, जिससे उन्होंने आत्महत्या कर ली। सीबीआई ने कहा कि मीणा की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज किया जाना चाहिए, क्योंकि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और उनकी गिरफ्तारी आवश्यक है ।CBI की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी अधिकारी हरिकेश मीणा, उस अवधि में HPPCL के प्रबंध निदेशक के पद पर थे जब मई 2023 में परियोजना को अहमदाबाद स्थित एक निजी कंपनी को ₹220.24 करोड़ में आवंटित किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि परियोजना 180 दिनों में पूरी होनी थी, लेकिन 153 दिन की देरी से 15 अप्रैल 2024 को ‘आंशिक रूप से पूर्ण’ स्थिति में सिंक्रोनाइज़ की गई।
प्रदेश उच्च न्यायालय में CrMP (M) No. 781/2025 में दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान CBI ने ये विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश की है।
अधूरे कार्य के बावजूद Completion Certificate जारी करने का आरोप
CBI के अनुसार, अधूरे कार्य के बावजूद 20 जून 2024 को Completion Certificate जारी किया गया। इसके बाद ठेकेदार ने अनुबंध मूल्य का 10 प्रतिशत भुगतान (माइलस्टोन-4) मांगा और यह राशि जारी भी कर दी गई।
रिपोर्ट कहती है कि परियोजना से जुड़े फील्ड अधिकारियों ने आपत्तियाँ उठाई थीं, लेकिन इसके बावजूद प्रबंधन स्तर पर भुगतान को मंज़ूरी दी गई।
ऑडिट रिपोर्ट में भी बड़े सवाल
HPPCL की 15 फरवरी 2025 की ऑडिट रिपोर्ट में भी परियोजना में विलंब और भुगतान पर सवाल उठाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, EoT (Extension of Time) और LD (Liquidated Damages) को अंतिम रूप दिए बिना ₹16.29 करोड़ का भुगतान किया गया, जिससे ठेकेदार को अनुमानित ₹12.73 करोड़ का ‘अनुचित लाभ’ पहुंचने की बात कही गई है।
मानसिक उत्पीड़न के आरोप—अधिकारी की हालत बिगड़ने का दावा
CBI की रिपोर्ट में कई गवाहों के हवाले से कहा गया है कि परियोजना अधिकारी स्व. विमल नेगी को कथित तौर पर
- अपमानित,
- मानसिक रूप से परेशान,
- और देर रात तक काम करने के लिए मजबूर किया जाता था।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि नेगी ने 10 मार्च 2025 को कहा था कि वह “बहुत परेशान” हैं और छुट्टी मिलने पर भी संदेह जताया था। गवाहों के अनुसार, प्रबंधन द्वारा “लगातार दबाव एवं अपमान” से उनका मानसिक तनाव बढ़ गया था।
CBI ने custodial interrogation की जरूरत बताई
CBI ने अदालत को बताया कि
- फॉरेंसिक रिपोर्टें अभी लंबित हैं,
- E-office फाइलों और हार्ड फाइलों में अंतर की जांच जारी है,
- और डेटा विश्लेषण के बाद कुछ गवाहों से फिर पूछताछ हो सकती है।
CBI ने कहा कि अगर आरोपी को अभी anticipatory bail दी गई तो कस्टोडियल इंटरोगेशन का अधिकार प्रभावित हो सकता है, जबकि जांच अभी जारी है।CBI ने अदालत से अनुरोध किया है कि स्टेटस रिपोर्ट को रेकॉर्ड पर रखा जाए और हरिकेश मीणा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की जाए।




