
आरोपी चिकित्सक आगामी आदेशों तक सस्पेंड,सरकार ने गठित की हाईपावर कमेटी,चिकित्सक के आधिकारिक बयान दर्ज,
डॉक्टर संगठन SAMDCOT और RDA भी चिकित्सक की फेवर में ।एकजुट,मांग संस्थान करे FIR दर्ज ,चिकित्सक भी क्रॉस FIR की तैयारी में
एक मरीज वार्ड के भीतर मीडिया को ब्रीफ कर रहा है और चंद मिनटों में इतनी भीड़ इकट्ठी की तो इसमें साजिश की बू,On Duty Assault on Doctors,A Non-Bailable Offence से चिकित्सक इस मामले को देख रहे हैं कि तर्क ये कि चिकित्सक की जान को खतरा रहा
IBEX NEWS,शिमला
मुझे केस इंटरेस्टेड लगा था ।दो मर्तबा ट्यूबरक्लोसिस और सरकोडोसिस हुआ पड़ा था मरीज को देखे बिना ही सोच रहा था इंटरवेंशन के लिए तगड़ा केस है और पूरी हिस्ट्री पढ़ने के बाद शक्ल देखते ही मुंह से फूटा अरे भाई ‘तू ‘तो पहले भी एडमिट हुआ है क्या,देखा देखा लग रहा है ।तू किसको बोला बे,बड़ा हू तहज़ीब से बात कर ।मैंने कहा कितना बड़ा,35-36 साल के हो और मैं 30 का। मै बार बार बात को टालने की कोशिश करता रहा और वो गालियों पर गालियाँ IV स्टैंड पकड़ कर हुज्जत करने लगा बोला अपने बाप से भी ऐसे ही बात करता है क्या? घरवालों पर मत जा,मैं अपने परिवारवालों के ख़िलाफ़ ऐसा नहीं सुन सकता ।आराम से बात करो ।उल्टा मरीज के अटेंडेट ने धमकिया दी कि तू जानता है कि कौन है? कितना बड़ा आदमी है,एक संस्थान में पढ़ाते है और डॉक्टरों को बनाने की बुड़क रखते हुए तीमारदार भी खरी खोटी सुनाने लगे धकामुक्की हुई और इस दौरान मरीज ने धड़ा -धड़ लाते बरसानी शुरू कर दी मैं कुछ समझ पाता वो मारे ही जा रहा था तो बचाव में मैंने भी धर दिए आख़िर हम डॉक्टर भी इंसान है । वार्ड में दाखिल मरीजों, तीमारदारों के अलावा पूरा स्टाफ था ।तीन सिस्टर ,अन्य साथी चिकित्सक सभी ने देखा कि किस कदर मरीज ने अपना आपा पहले खोया ।ये कोई किसी फ़िल्म की मनघंडत स्क्रिप्ट नहीं अपितु प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी में बीते कल हुई घटना के बाद आरोपी डॉक्टर राघव ने पुलिस को देर रात दर्ज आधिकारिक बयान के कुछ अंश है। पल्मोनरी मेडिसिन विभाग मे डॉक्टर और मरीज के बीच तहज़ीब की ठंडी तासीर के साथ शुरू हुए एक घटनाक्रम से देखते-देखते ऐसा रायता फैला कि सोशल मीडिया में उस पर लगाए गए तड़कों ने कहानी को कुछ से कुछ कर दिया। एक अधूरे वीडियो ने पूरे घटनाक्रम को पलट कर रख दिया ऐसे में जब मरीज के अटेंड ने केवल वीडियो बनाने पर जोर दिया उसे पकड़ा या समझाया नहीं। सोशल मीडिया पर पेश की गई वायरल तस्वीर न सच्ची है, न पूरी। आरोप है कि इसे अपने मुताबिक़ परोसा गया ।इलाज की जगह अब ट्रेंड, तथ्य की जगह अफ़वाह और इंसाफ़ की जगह मीडिया ट्रायल हावी हो गया है। एक मरीज वार्ड के भीतर मीडिया को ब्रीफ कर रहा है और चंद मिनटों में इतनी भीड़ इकट्ठी की तो इसमें साजिश की बू आ रही है ।ऑन ड्यूटी असॉल्ट ऑन डॉक्टर्स ,A Non-Bailable Offence से डॉक्टर्स इस मामले को देख रहे हैं ।डॉक्टर संगठन SAMDCOT और RDA भी चिकित्सक की फेवर में एकजुट है और मांग है कि संस्थान FIR दर्ज करें ।चिकित्सक भी क्रॉस FIR की तैयारी है । ऐसे में जब चिकित्सक की जान को खतरा रहा है उन्हें घंटों तक भीड़ से झूझना पड़ा । देर रात तक कई कई ग्रुप्स में लोग कैंपस में मौजूद रहे जो चेहरे दिन में नारेबाजी तो कर ही रहे थे साथ ही साथ डॉक्टर को भीड़ के हवाले करने की जिद करते रहे।इस दौरान सिस्टम की चूक और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल बना । पल्मोनरी मेडिसिन विभाग में हुई इस घटना को लेकर जहां एक ओर मरीज ने डॉक्टर पर मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर आरोपी डॉक्टर डॉ. राघव ने पुलिस को दिए बयान में खुद को हमले का शिकार बताया है।उधर चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द तथ्यों के साथ आधिकारिक बयान, पर्याप्त पुलिस सुरक्षा और दोषी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो डॉक्टर सामूहिक रूप से काम रोकने जैसे कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगे।डॉक्टरों की डॉक्टरी को ही कटघरे में खड़ा कर दिया गया, जबकि ज़मीनी सच्चाई कहीं पीछे छूट गई।चिकित्सकों का आरोप है कि इस डिजिटल रायते में सच दब गया, और कुछ लोगों ने जानबूझकर ऐसा तड़का लगाया कि डॉक्टर हैवान और हमलावर मासूम दिखने लगे। टीआरपी की भूख में ‘रक्षक’ को ‘हैवान “ दिखाने की साजिशे रची जा रही है ।अस्पताल वार्ड में 6 गंभीर मरीज वेंटिलेटर पर भर्ती थे,लेकिन डर और अराजक माहौल में काम करना तक मुश्किल होता रहा ।रेज़िडेंट डॉक्टरों और मेडिकल संगठनों ने प्रशासन से सवाल पूछा है—जब प्रत्यक्षदर्शी मौजूद हैं, तो एफआईआर क्यों नहीं?डॉक्टरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?डॉक्टरों का दो टूक संदेश है—अधूरे वीडियो से न्याय नहीं, सच से फैसला होना चाहिए।15 सेकंड की वीडियो के आधार पर डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया ?
सोशल मीडिया पर एक नजर






मेडिकल संगठनों का कहना है कि यह न सिर्फ़ डॉक्टरों पर हमला है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सीधा प्रहार है। इसको लेकर संस्थान को FIR करनी चाहिए ऐसे में जब इलाज के लिए रखे कई इक्विपमेंट से मरीज ने प्रहार किए और जिन स्टाफ ने मरीज को संभालने की कोशिश की इस जद्दोजहद में भी सरकारी प्रॉपर्टी को नुकसान की सूचना है।चिकित्सक भी क्रॉस FIR की तैयारी कर रहे हैं कि वार्ड में सीसीटीवी नहीं था और इस तर्क के साथ कि घटना का अधूरा वीडियो परिजनों ने वायरल किया है और जिसमें साजिश पूरी है इसी के आधार पर हाईपॉवर कमेटी के गठन के आदेश राज्य सरकार ने जारी किए हैं और इंसिडेंट के 4घंटे के भीतर आरोपी डॉक्टर को सस्पेंड कर दिया गया है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज के MS डॉ. राहुल राव ने बताया कि मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।मामला दोपहर 12:00 बजे का है जब शिमला जिला के कुपवी के मशोत गांव के रहने वाले अर्जुन का ब्रोंकोस्कॉपी टेस्ट किया गया। इसके बाद उन्हें संबंधित डॉक्टर ने बेड पर आराम करने के लिए कहा।दो घंटे बाद एक्स रे को कहा था ।इसी दौरान सीनियर रेजीडेंट से बात हुई ।मरीज का आरोप है कि चिकित्सक ने “तू “करके बात की । विरोध किया, तो डॉक्टर उस पर टूट पड़ा, उसने मुंह पर घूंसे मारने शुरू कर दिए।इस घटना के बाद भड़के परिजनों ने अस्पताल परिसर में चिकित्सक की मरीज के साथ की गई मारपीट के मामले के विरोध हंगामा कर दिया।
परिसर में चिकित्सक की बर्खास्तगी, और उसको सामने ला कर माफी मंगवाने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन मारपीट की इस घटना के बाद मरीज के साथ आए उसके भाई रमेश कुमार और अन्य परिजनों ने एकत्र हो कर अस्पताल परिसर में ही चिकित्सक को बर्खास्त किये जाने की मांग की ।कई राजनीतिक दल राजनीतिक रोटियाँ सेंकने लग गए हैं ।
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक किसी तरह से परिजनों को आईजीएमसी प्राचार्य के रूम में लेकर गए। यहां प्रशासन के साथ बंद कमरे में पूरे मामले को लेकर बैठक हुई।घटना की सूचना मिलने पर सदर थाना और लक्कड़ बाजार पुलिस चौकी से आई पुलिस ने मरीज के बयान दर्ज किये। परिजनों ने पुलिस में आरोपी डॉक्टर के खिलाफ शिकायत देकर मामला दर्ज करने की मांग की।
‘आईजीएमसी में मरीज के साथ हुई मारपीट की घटना दुर्भाग्यपूर्ण, संज्ञान ले सरकार’
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा की आईजीएमसी शिमला में मरीज के साथ हुई मारपीट की घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसा नहीं होना चाहिए था। इस तरीके की घटनाएं हमारे व्यावसायिक दक्षता और क्षमता पर भी सवाल उठाती हैं। मुख्यमंत्री को स्वयं इस मामले में संज्ञा लेना चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए। साथ ही आईजीएमसी प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाएं फिर न हों।
कौन हैं डॉक्टर राघव :प्रोटोकॉल से आगे बढ़कर इंसानियत: डॉ. राघव नरूला खुद एंबुलेंस में मरीज को पीजीआई तक ले गए
डॉ. राघव नरूला एक पल्मोनरी (श्वसन रोग) विशेषज्ञ हैं। वे अक्तूबर 2023 में हिमाचल प्रदेश के डॉ. वाई.एस. परमार मेडिकल कॉलेज, नाहन (जिला सिरमौर) में तैनात थे। डॉ. राघव मूल रूप से पांवटा साहिब, जिला सिरमौर के निवासी हैं।19 अक्तूबर 2023 को पातलियों गांव की रहने वाली 22 वर्षीय युवती, जो दमे (अस्थमा) से पीड़ित थी, की हालत नाहन मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान बेहद गंभीर हो गई। स्थिति बिगड़ने पर उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया।सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि गंभीर मरीज के साथ एंबुलेंस में कौन जाएगा, जबकि नियमों में गरीब मरीज के लिए रेडक्रॉस सोसाइटी की एंबुलेंस उपलब्ध करवाई गई।
नाहन मेडिकल कॉलेज में तैनात पल्मोनरी विशेषज्ञ डॉ. राघव नरूला ने मानवता की मिसाल पेश की। पातलियों गांव की 22 वर्षीय युवती, जो दमा से पीड़ित थी, की हालत गंभीर होने पर उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया। गरीब मरीज के लिए रेडक्रॉस एंबुलेंस की व्यवस्था की गई, लेकिन नियमों में डॉक्टर के साथ जाने का प्रावधान न होने के बावजूद डॉ. राघव नरूला स्वयं एंबुलेंस में मरीज के साथ चंडीगढ़ तक गए और पूरी यात्रा के दौरान उसकी निगरानी की। पांवटा साहिब निवासी डॉ. राघव के इस संवेदनशील कदम की व्यापक सराहना हो रही है।डॉ. राघव नरूला मूल रूप से पांवटा साहिब, जिला सिरमौर के रहने वाले हैं। उनके इस संवेदनशील और मानवीय कदम की हर तरफ सराहना हो रही है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सच्चा डॉक्टर वही होता है, जो सिर्फ इलाज ही नहीं बल्कि जिम्मेदारी और करुणा भी निभाता है।









