
IBEX NEWS,शिमला ।
हिमाचल प्रदेश के प्रीमियर चिकित्सा संस्थान आईजीएमसी शिमला से कार्डियोलॉजी विभाग से विभागाध्यक्ष सेवानिवृत फेमस कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पी.सी. नेगी ने आईजीएमसी शिमला की हालिया घटना को केवल एक रेजिडेंट डॉक्टर के व्यक्तिगत दुराचार का मामला मानने से इनकार किया है। उनके अनुसार, यह प्रकरण दरअसल स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ते दबाव और समाज में पनप रही विकृत प्रवृत्तियों का प्रतिबिंब है।


डॉ. नेगी बताते हैं कि उपलब्ध रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक मामूली मौखिक विवाद—जो डॉक्टर द्वारा अनौपचारिक संबोधन और कथित मरीज दुर्व्यवहार से शुरू हुआ—धीरे-धीरे दोनों पक्षों के बीच हिंसा में बदल गया। वायरल वीडियो सामने आने के बाद हिमाचल सरकार ने डॉक्टर की सेवाएं तत्काल समाप्त कर दीं, लेकिन जिन लोगों पर डॉक्टर को धमकाने या उस पर हमला करने के आरोप लगे, उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न होना निष्पक्षता और ड्यू प्रोसेस पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
डॉ. नेगी के अनुसार, इस तरह की घटनाओं के पीछे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले वार्ड, स्टाफ की भारी थकान (बर्नआउट) और अस्पतालों में प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था का अभाव जैसे कारण हैं। इसके अलावा सांस्कृतिक संवेदनशीलता, पदानुक्रमित सोच और सरकारी संस्थानों के प्रति अविश्वास ने हालात को और बिगाड़ा।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और राजनीतिक लोकलुभावनता के दौर में भीड़ द्वारा त्वरित न्याय को स्वीकार करना आम होता जा रहा है, जहां प्रतीकात्मक सज़ा दी जाती है लेकिन सिस्टम सुधार पीछे छूट जाता है।
डॉक्टर संगठनों का मानना है कि इस तरह के एकतरफा फैसले स्वास्थ्यकर्मियों का मनोबल तोड़ते हैं और भीड़ के दबाव को बढ़ावा देते हैं। डॉ. नेगी ने जोर देकर कहा कि यह घटना भारत की जर्जर सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था, कमजोर संवाद संस्कृति और डॉक्टरों व मरीजों—दोनों के लिए संस्थागत सुरक्षा के अभाव को उजागर करती है।
उनका मानना है कि समाधान का रास्ता संतुलित सुधारों से होकर जाता है—जहां पेशेवर जवाबदेही के साथ-साथ स्वास्थ्यकर्मियों को हिंसा से सुरक्षा, पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली और डॉक्टर–मरीज संबंधों में आपसी सम्मान बहाल करने की ठोस पहल की जाए।




