
IBEX NEWS,शिमला।
आईजीएमसी शिमला में तैनात वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. राघव नरूला की सेवाएं समाप्त किए जाने के मामले में हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से हस्तक्षेप की मांग की है। महासंघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बर्खास्तगी के आदेश को राज्यहित में वापस लेने (रिवोकेशन) का अनुरोध किया है।
महासंघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और महासचिव हीरा लाल वर्मा द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि डॉ. राघव नरूला की सेवाएं बिना विभागीय जांच, बिना चार्जशीट और बिना सुनवाई का अवसर दिए समाप्त कर दी गईं, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। इससे न केवल चिकित्सा समुदाय में रोष है, बल्कि कर्मचारियों में भी गंभीर चिंता का माहौल बना हुआ है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कथित घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी और किसी भी प्रकार की हिंसा की महासंघ निंदा करता है, लेकिन लगाए गए आरोपों की तुलना में दी गई सजा अत्यंत असंगत और अनुपातहीन है। महासंघ ने स्पष्ट किया कि CCS (CCA) Rules, 1965 के तहत सेवा समाप्ति एक बड़ी सजा है, जिसे केवल नियमित विभागीय जांच और आरोप सिद्ध होने के बाद ही लागू किया जा सकता है। इस मामले में Rule 14 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह उल्लंघन किया गया है।
महासंघ ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि मामले की समीक्षा कर बर्खास्तगी आदेश को वापस लिया जाए, क्योंकि इस तरह की कार्रवाई से डॉक्टरों और मरीजों के बीच विश्वास का संबंध प्रभावित होगा, जो चिकित्सा व्यवस्था की बुनियाद है।
संयुक्त कर्मचारी महासंघ ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री इस मामले में न्यायसंगत निर्णय लेते हुए निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगे।




