
IBEX NEWS,शिमला
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला में हाल ही में घटी घटना को लेकर देशभर में उभरी चिंता के बीच, वरिष्ठ चिकित्सक नेता डॉ. दिव्यांश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और संवैधानिक प्रक्रिया के पालन की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली और उसमें कार्यरत डॉक्टरों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
डॉ. दिव्यांश सिंह ने पत्र में उल्लेख किया कि घटना से संबंधित एक आंशिक वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद त्वरित जनआक्रोश और प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली, जबकि बाद में सामने आए तथ्यों से संकेत मिला कि वीडियो पूरी घटना को नहीं दर्शाता। उन्होंने कहा कि डॉक्टर को पहले कथित रूप से मौखिक दुर्व्यवहार और शारीरिक आक्रामकता का सामना करना पड़ा, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि संविधान प्रत्येक नागरिक को जीवन, गरिमा और निष्पक्ष प्रक्रिया का अधिकार देता है। केवल सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री के आधार पर, बिना समुचित जांच के, कठोर दंडात्मक निर्णय लेना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को कमजोर करता है। डिजिटल युग में प्रशासनिक निर्णय जनभावना पर नहीं, बल्कि सत्यापित तथ्यों और विधिक प्रक्रिया पर आधारित होने चाहिए।
डॉ. दिव्यांश सिंह ने स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को सार्वजनिक हित का विषय बताते हुए कहा कि डॉक्टर अत्यधिक दबाव और सीमित संसाधनों के बीच मरीजों की सेवा करते हैं, लेकिन किसी भी परिस्थिति में मौखिक या शारीरिक हिंसा स्वीकार्य नहीं हो सकती। अस्पतालों में सुरक्षा तंत्र की कमजोरी न केवल डॉक्टरों, बल्कि मरीजों की सुरक्षा के लिए भी खतरा है।
पत्र में हिंसा और आत्मरक्षा के बीच स्पष्ट अंतर करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यह तय किया जाना चाहिए कि कोई कृत्य बिना उकसावे की हिंसा है या फिर तत्काल खतरे की स्थिति में की गई आत्मरक्षा। दोनों को समान दृष्टि से देखना न्यायसंगत नहीं होगा।
मीडिया की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि स्वतंत्र मीडिया लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है, लेकिन जिम्मेदार रिपोर्टिंग उतनी ही आवश्यक है। चयनित और संपादित वायरल वीडियो किसी संस्थागत जांच का विकल्प नहीं बन सकते, क्योंकि इससे किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और करियर को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
प्रधानमंत्री के समक्ष रखे गए प्रमुख सुझावों में—
- स्वास्थ्यकर्मियों से जुड़े मामलों में समयबद्ध और निष्पक्ष जांच के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश,
- सरकारी अस्पतालों में न्यूनतम सुरक्षा मानकों को अनिवार्य करना,
- स्वास्थ्यकर्मियों के लिए मजबूत कानूनी संरक्षण ढांचा,
- और भ्रामक डिजिटल सामग्री से पैदा हो रहे ‘जनमत द्वारा न्याय’ की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के उपाय शामिल हैं।


पत्र के अंत में डॉ. दिव्यांश सिंह ने कहा कि देश के डॉक्टर जवाबदेही से नहीं भागते, वे केवल निष्पक्षता, सुरक्षा और गरिमा की अपेक्षा रखते हैं—जो संविधान और न्यायपूर्ण समाज की मूल भावना है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मरीजों के अधिकारों और डॉक्टरों की सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करते हुए एक मजबूत और भरोसेमंद स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण किया जाएगा।




