
मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद RDA ने स्ट्राइक ऑफ की घोषणा की, लेकिन लिखित आदेशों के बिना बहाली और सुरक्षा पर संशय बरकरार रहने पर RDA का कुनबा बिखरा
IBEX NEWS,शिमला
हिमाचल की सर्द फिजाओं में IGMC मामला अब पूरी तरह सियासी गर्मी में बदल चुका है। शुरुआती टकराव के सूत्रधार मरीज जिन्हें सरकार की प्रारंभिक जांच में दोषी माना और परिजन जिन्होंने डॉक्टर को घंटों कमरे में बंधक रखा, धमकाया और भीड़ भड़काई—बिना किसी कार्रवाई के परिदृश्य से गायब हैं। अब पूरा विवाद साफ तौर पर “सरकार बनाम डॉक्टर्स” बन चुका है। सवाल सीधा है—जब दोषी मरीज और डॉक्टर दोनों माने गए, तो सजा सिर्फ डॉक्टर को नौकरी और SR-शिप से हटाकर ही क्यों?राजनीतिक मोर्चे पर भी हलचल तेज़ है। विपक्ष इस मुद्दे पर खुलकर सियासी रोटियाँ सेंक रहा है।राजस्व मंत्री जगत सिंह का आरोप रहा की बीजेपी के कई सुर है ।इस मसले पर बंटी है ।एक विधायक फेवर में तो दूसरा विरोध में बयान दे रहा है तो नेता प्रतिपक्ष के इंसिडेंट के पहले दिन से बयान बदल रहें है। समाज सेवक माफीनामे को लेकर गुजारिश की अर्जी दे रहे है।बेगानी शादी में अब्दुल्ला दूल्हा, बेगाना वाली स्थिति है।
दिल्ली से लौटते ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हड़ताली डॉक्टरों से ड्यूटी पर लौटने की अपील की और वरिष्ठ चिकित्सकों से चर्चा व री-इंक्वायरी का भरोसा दिया। इसके बाद RDA ने देर शाम स्ट्राइक ऑफ का ऐलान तो किया, लेकिन लिखित आदेशों के बिना असंतोष और असमंजस बरकरार है।
RDA के भीतर दरार साफ़ दिखी है। एक धड़ा हड़ताल वापसी के पक्ष में है, जबकि आर्मी बैकग्राउंड से जुड़े चिकित्सक समूह सुरक्षा और डॉ. की बहाली के लिखित आदेश के बिना पीछे हटने को तैयार नहीं। उधर ऑल इंडिया डॉक्टर्स फेडरेशन, प्राइवेट प्रैक्टिशनर्स, एम्स दिल्ली, चंडीगढ़, फरीदाबाद और लद्दाख की RDA ने समर्थन का एलान किया है “वी वांट जस्टिस” के नारे आरडीए की स्ट्राइक कॉल ऑफ की घोषणा के साथ आर्मी बैकग्राउंड के चिकित्सक वाले दूसरे धड़े ने लगाए ।कहा कि सिक्योरिटी इश्यूज ,डॉ की बहाली के लिखित आदेशों के बिना कुछ नहीं होगा।नतीजन,सोमवार को डॉक्टर जॉइन करेंगे या नहीं, इस पर संशय कायम है। बीते दिनों बंद कमरों में बाय हुक और क्रूक दबाव बनाया गया—लिखित माफ़ी मांगो, बाकी सब हो जाएगा। फेस-टू-फेस बातचीत या लिखित आदेशों पर उपर विशेष सलाह देने वाले बार बार दोहराते रहे कि हड़ताल वापस लो और अपने संघ को बोल पदाधिकारियों को भी खूब कसा गया कि ESMA ठोकेंगे । परिणाम ये हुआ की ठीकरा फोड़ने की तैयारी हुई कि बैडमिंटन कोर्ट में चल रही हड़ताल में बोल दो कि अब बस । बताते हैं कि वरिष्ठ तो पहले ही बैकफुट पर रहे कि सभी की अपनी अपनी मजबूरियाँ है किसी को बड़ी कुर्सी की चाह है तो कोई किसी झमेले नहीं फँसना चाहते तो कोई साख पर आँच नहीं चाहते । नतीजा,अकेले लड़ने वाला धड़ा टूट और झुक गया पूरा एपिसोड और गरमा गया ।ऐसे में सवाल जस का तस है—जब डॉक्टर और मरीज संवाद को तैयार हैं, तो सियासी रोटियाँ क्यों सेंकी जा रही हैं? SAMDCOT के कई वरिष्ठ चिकित्सक सरकार के लिखित आदेशों के बिना संतुष्ट नहीं हैं। उनका साफ कहना है कि कहीं यह मामला भी NPA के झुनझुने की तरह न रह जाए—वादे बहुत, हासिल आज तक फूटी कौड़ी भी नहीं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब सरकार हादसे के तुरंत बाद डॉ. राघव को SR-शिप और नौकरी से हटा सकती है, तो चाहे तो बहाली के निर्देश भी जारी कर सकती है।
चिकित्सक संगठनों के भीतर यह राय मजबूत है कि डॉ. निरुला को तुरंत अदालत का दरवाज़ा खटखटाना चाहिए। कानूनी जानकारों के मुताबिक इन आदेशों पर जल्दी स्टे लग सकता है, और तभी निष्पक्ष व विधिसम्मत जांच की राह खुलेगी। इसके उलट आशंका यह है कि सरकार सस्पेंशन या टर्मिनेशन के आदेश वापस लेने के मूड में नहीं, बल्कि बिना किसी ठोस लिखित गारंटी हर हाल में हड़ताल खत्म कराना चाहती है।
सरकार की सख्त नसीहत भी सामने आई—अगर स्ट्राइक खत्म नहीं हुई तो शीतकालीन अवकाश पर गए चिकित्सकों को वापस बुलाया जाएगा।




Unfortunately he had pneumothorax and had to be admitted.

डॉ. राघव नरूला की टर्मिनेशन पर विस्तृत जांच और आदेशों की समीक्षा का भरोसा, जनहित को प्राथमिकता बताते हुए आंदोलन स्थगित।




