
ऑपरेशन से काटी गई टांग मुंह में दबाए कैंपस में घूमता रहा कुत्ता, वायरल वीडियो पर शिमला पुलिस ने साझा की सच्चाई
शिमला, 24 फरवरी 2026।
“जिसकी ये टांग होगी… उस पर और उसके अपनों पर क्या बीती होगी जब पता चला होगा कि ऑपरेशन से काटी गई टांग लेकर कुत्ता कैंपस में घूम रहा है।” यह सवाल आज पूरे शहर की संवेदनाओं को झकझोर रहा है।
चम्याना स्थित अटल सुपर स्पेशियलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान, चम्याना के परिसर में एक आवारा कुत्ते द्वारा मानव टांग मुंह में दबाकर घूमने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सनसनी फैल गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए शिमला पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और बुधवार को मीडिया के साथ तथ्य साझा किए।
पुलिस के अनुसार 19 फरवरी 2026 को मंडी जिला के 61 वर्षीय अत्र सिंह की टांग का ऑपरेशन इसी अस्पताल में किया गया था। चिकित्सकीय आवश्यकता के चलते उनकी टांग काटनी पड़ी। ऑपरेशन के बाद मानव अवशेष को नियमानुसार पैक कर अस्पताल के स्टोर रूम में सुरक्षित रखा गया था। प्रशासन ने इसे अधिकृत संस्था को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की थी, किंतु संबंधित संस्था का कोई कर्मचारी लेने नहीं पहुंचा।
जांच में सामने आया कि 22 फरवरी की रात स्टोर से ट्रॉलियां निकालते समय कर्मचारियों द्वारा दरवाजा ताला लगाना भूल गए। दरवाजा केवल बंद किया गया था, जो संभवतः हवा के कारण खुल गया। इसी दौरान एक आवारा कुत्ता स्टोर में घुस गया और पैक किया गया लिफाफा उठाकर ले गया।
23 फरवरी को स्टोर के पास खाली लिफाफा मिलने पर अस्पताल प्रशासन को मानव टांग के गायब होने की जानकारी हुई। 24 फरवरी को वही कुत्ता अस्पताल के मुख्य द्वार की ओर मुंह में टांग दबाए जाता दिखाई दिया, जिसका वीडियो बनाकर लोगों ने सोशल मीडिया पर डाल दिया।
यह घटना केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा पर गहरा आघात है। जिस मरीज ने ऑपरेशन के दौरान अपनी टांग गंवाई और जो पहले ही शारीरिक व मानसिक पीड़ा से गुजर रहा है, उसके लिए यह खबर किसी दूसरे सदमे से कम नहीं होगी। परिवार के लिए भी यह क्षण अत्यंत वेदनापूर्ण रहा होगा।
शिमला पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में अस्पताल प्रबंधन द्वारा आंतरिक जांच की जा रही है। संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है और लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह घटना स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था, जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन और मानवीय संवेदनशीलता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।




