
प्राकृतिक उत्पादों के मूल्य संवर्धन, पोषण महत्व, उद्यमिता कौशल एवं सरकारी योजनाओं की दी गई जानकारी
IBEX NEWS BUREAU,शिमला
पंचायत कोठी में 17वो एवं 18 अप्रैल को खाद्य प्रसंस्करण विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर में 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन द्वारा आरकेवीवाई परियोजना के अंतर्गत किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य विषय “प्राकृतिक उत्पादों का तकनीकी हस्तक्षेप के माध्यम से सतत आजीविका हेतु उपयोग” रहा। प्रशिक्षण का उद्देश्य स्थानीय कृषि उत्पादों के वैज्ञानिक प्रसंस्करण द्वारा ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं के लिए आय एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना था।

विश्वविद्यालय से आए विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार वर्मा ने अपने व्याख्यान में मिलेट्स (मोटे अनाज) एवं स्थानीय प्राकृतिक उत्पादों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इनके मूल्य संवर्धन से न केवल आय में वृद्धि होती है, बल्कि इनके पोषण गुणों (Nutritional Value) को सुरक्षित रखते हुए संतुलित आहार उपलब्ध कराया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय से आए श्री चंदर द्वारा विभिन्न खाद्य प्रसंस्करण तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) किया गया, जिससे प्रतिभागियों को तकनीकी प्रक्रियाओं की गहन जानकारी प्राप्त हुई।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकरण योजना (PMFME) एवं सम्पदा योजना (SAMPADA) के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही खाद्य व्यवसाय स्थापित करने के लिए FSSAI लाइसेंस एवं पंजीकरण प्राप्त करने की प्रक्रिया, ब्रांडिंग एवं विपणन के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
शिविर के अंतर्गत प्रतिभागियों को मफिन, जैम, स्क्वैश, पास्ता एवं प्राकृतिक बायो-एंजाइम के निर्माण की हैंड्स-ऑन प्रैक्टिस करवाई गई। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि प्रसंस्कृत उत्पादों का पोषण महत्व किस प्रकार बनाए रखा जा सकता है तथा संतुलित आहार में इनका योगदान कैसे बढ़ाया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त उद्यमिता कौशल, लागत निर्धारण, विपणन रणनीतियां तथा सेमी-फिनिश्ड उत्पादों के उपयोग पर भी जानकारी प्रदान की गई।
प्रतिभागियों को खाद्य पदार्थों के खराब होने (स्पॉइलिज) के कारणों, विशेष रूप से सूक्ष्मजीवों (माइक्रोऑर्गेनिज़्म) द्वारा होने वाली खराबी के बारे में बताया गया। साथ ही स्वच्छता (Cleanliness) एवं सुरक्षित खाद्य उत्पादन के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।
इस दौरान अपशिष्ट (Waste) से उपयोगी उत्पाद (By-products) बनाने तथा प्राकृतिक बायो-एंजाइम के महत्व पर भी चर्चा की गई, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अतिरिक्त आय के अवसर उत्पन्न किए जा सकते हैं।
प्रशिक्षण में महिलाओं ने विशेष रुचि दिखाई उन्हें उत्पादों के विपणन (Marketing) एवं उचित लेबलिंग (Proper Labelling) के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई, जिससे उनके उत्पादों को बाजार में बेहतर पहचान मिल सके।
इस प्रशिक्षण शिविर में सीमा वीना नीलम रामेश्वरी आरती साहिल देवा जगमो मुकेश सहित अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी बताते हुए इन तकनीकों को अपनाकर अपनी आजीविका को सुदृढ़ बनाने की इच्छा व्यक्त की।
फोटो कैप्शन:
कोठी में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दौरान प्रतिभागियों को खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन की तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देते विशेषज्ञ।




