
हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों का इंतज़ार खत्म हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के 51 शहरी निकायों में चुनाव करवाने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए आयोग 31 मई से पहले चुनावी प्रक्रिया संपन्न करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस घोषणा के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श चुनाव आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
IBEX NEWS,शिमला
हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों का इंतज़ार खत्म हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के 51 शहरी निकायों में चुनाव करवाने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए आयोग 31 मई से पहले चुनावी प्रक्रिया संपन्न करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस घोषणा के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श चुनाव आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
चार नगर निगमों में पार्टी चिह्न पर जंग
इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है क्योंकि सोलन, धर्मशाला, पालमपुर और मंडी नगर निगमों के चुनाव राजनीतिक दलों के अधिकृत चुनाव चिह्नों पर लड़े जाएंगे। इसके अलावा 25 नगर परिषद और 22 नगर पंचायत क्षेत्रों में भी पार्षद चुनने के लिए मतदान होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के कुल 74 शहरी निकायों में से केवल 51 में ही अभी चुनाव हो रहे हैं, क्योंकि शिमला नगर निगम का कार्यकाल अभी बाकी है और कुछ नवनिर्मित निकायों में आरक्षण रोस्टर व परिसीमन के कारण चुनाव दो साल बाद कराए जाएंगे।
चुनावी कार्यक्रम और नामांकन की प्रक्रिया
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया 29 अप्रैल से शुरू होगी। प्रत्याशी 29, 30 अप्रैल और 2 मई को अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की वापसी 6 मई दोपहर 3 बजे तक की जा सकेगी। मतदान की तिथि 17 मई तय की गई है, जहाँ सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक वोट डाले जाएंगे। नगर परिषद और नगर पंचायतों के नतीजों की घोषणा मतदान के तुरंत बाद उसी दिन कर दी जाएगी, जबकि चारों नगर निगमों की मतगणना 31 मई को होगी।
मतदाताओं का आंकड़ा और केंद्रों की व्यवस्था
लोकतंत्र के इस उत्सव में इस बार 3, 60, 845 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें 1, 80, 963 पुरुष और 1, 79, 882 महिला मतदाता शामिल हैं। विशेष बात यह है कि 1808 युवा पहली बार वोट डालकर अपनी सरकार चुनेंगे। आयोग ने मतदान के लिए 1806 केंद्र स्थापित किए हैं। पारदर्शिता और सुविधा के लिए मतदान केंद्रों पर महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग से सहायक केंद्र बनाने के निर्देश दिए गए हैं। मतदाता अपनी पहचान के लिए आयोग द्वारा निर्धारित 16 प्रकार के पहचान पत्रों का उपयोग कर सकेंगे।
खर्च की सीमा और आचार संहिता की सख्ती
चुनाव में धनबल के प्रयोग को रोकने के लिए निर्वाचन आयोग ने खर्च की सीमा तय कर दी है। नगर निगम के प्रत्याशी अधिकतम 1 लाख रुपये, नगर परिषद के प्रत्याशी 75 हजार रुपये और नगर पंचायत के प्रत्याशी 50 हजार रुपये ही खर्च कर पाएंगे। साथ ही, चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए मतदान से 48 घंटे पूर्व और मतगणना के दिन शराब के ठेके पूरी तरह बंद रहेंगे। आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन पर आयोग ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। 3758 पंचायतों पर टिकी निगाहें
शहरी निकायों के साथ-साथ प्रदेश की 3758 ग्राम पंचायतों में भी चुनावी सरगर्मी तेज है। राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने आश्वासन दिया है कि पंचायतों में प्रधान, उपप्रधान, वार्ड पंच, जिला परिषद और बीडीसी सदस्यों के चुनाव की घोषणा अगले एक सप्ताह के भीतर कर दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार और आयोग के बीच किसी भी तरह का टकराव नहीं है और प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियां पूरी हैं।
प्रशासनिक अलर्ट और कर्मचारियों की तैनाती
चुनाव को निष्पक्ष और सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए प्रदेश के लगभग 50 हजार सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। आयोग ने चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के भत्तों में भी बढ़ोतरी की है। प्रशासन को मुस्तैद रखने के लिए सभी जिलों के डीसी, एसडीएम, जिला पंचायत अधिकारी और खंड विकास अधिकारियों (BDO) को कड़े आदेश दिए गए हैं कि वे चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक अपना स्टेशन (मुख्यालय) न छोड़ें।
सोलन, मंडी, धर्मशाला और पालमपुर नगर निगमों समेत कुल 51 निकायों में 17 मई को मतदान होगा। विशेष बात यह है कि नगर निगमों के चुनाव राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न पर लड़े जाएंगे। वहीं, प्रदेश की 3758 पंचायतों में चुनाव की तारीखों का ऐलान भी अगले एक सप्ताह के भीतर कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, आयोग ने 31 मई तक संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा है।
राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची के स्पष्टीकरण से यह साफ़ हो गया है कि फिलहाल केवल 51 शहरी निकायों के लिए ही बिगुल बजा है, जहाँ आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो चुकी है। यद्यपि पंचायत चुनावों की घोषणा आज नहीं की गई है, लेकिन आयुक्त ने एक सप्ताह के भीतर अधिसूचना जारी करने का ठोस आश्वासन देकर ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाताओं और प्रत्याशियों का इंतज़ार लगभग ख़त्म कर दिया है। इससे यह भी सुनिश्चित होता है कि निर्वाचन आयोग सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई 31 मई की समयसीमा के भीतर ही शहरी और ग्रामीण, दोनों स्तरों पर चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्षता से संपन्न कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।



