“नारी शक्ति के अधिकारों से डरती है कांग्रेस—महिलाओं का आक्रोश बनेगा सत्ता परिवर्तन का आधार”
IBEX NEWS BUREAU,शिमला, 23 अप्रैल 2026: भाजपा प्रदेश महामंत्री पायल वैद्य ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देशभर में महिलाओं के अधिकारों की एक ऐतिहासिक पहल की गई थी, जिसके तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष संसद सत्र बुलाकर महिलाओं को पंचायत से लेकर संसद तक 33 प्रतिशत आरक्षण देने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि देश की मातृशक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम था। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इस ऐतिहासिक अवसर का विरोध कर महिलाओं के अधिकारों को रोकने का काम किया। पायल वैद्य ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा, “जो ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का नारा देती हैं, उन्होंने महिलाओं के अधिकारों की सबसे बड़ी लड़ाई में साथ क्यों नहीं दिया?” उन्होंने कहा कि जब संसद में इस विधेयक पर मतदान हुआ और बिल गिरा, तो कांग्रेस नेताओं ने तालियां बजाकर अपनी मानसिकता को उजागर किया। “यह दर्शाता है कि कांग्रेस केवल नारे देती है, लेकिन जब महिलाओं को अधिकार देने की बात आती है तो पीछे हट जाती है,” उन्होंने कहा। प्रदेश कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए पायल वैद्य ने कहा कि हिमाचल में कांग्रेस का महिला विरोधी चेहरा साफ नजर आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस संगठन में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया और हाल ही में हुए संगठनात्मक चुनावों में एक भी महिला को ब्लॉक अध्यक्ष नहीं बनाया गया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार में भी महिलाओं को पर्याप्त स्थान नहीं दिया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस की नीयत और नीति दोनों ही महिला विरोधी हैं।
भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष डेज़ी ठाकुर ने महिला आरक्षण बिल गिरने को “लोकतंत्र का काला दिन” बताते हुए कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर महिलाओं के अधिकारों से विश्वासघात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत 33% आरक्षण एक ऐतिहासिक अवसर था, जिसे विपक्ष ने गंभीरता से नहीं लिया और संसद में जश्न मनाकर अपनी मानसिकता उजागर की। ठाकुर ने कांग्रेस पर महिलाओं को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने और परिवारवाद के चलते आम महिलाओं को पीछे रखने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा सरकार की योजनाओं को महिला सशक्तिकरण का उदाहरण बताया। उन्होंने “जन आक्रोश महिला पदयात्रा” के माध्यम से विरोध तेज करने का ऐलान करते हुए कहा कि नारी शक्ति अब सड़कों पर उतरकर लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी और यह मुद्दा कांग्रेस के राजनीतिक नुकसान का कारण बनेगा
इसके विपरीत भाजपा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठन में 33 प्रतिशत से अधिक महिला आरक्षण पहले ही लागू कर रखा है और महिलाओं को नेतृत्व के अवसर दिए जा रहे हैं। पायल वैद्य ने कहा कि 23 अप्रैल को शिमला में आयोजित होने वाली “जन आक्रोश महिला पदयात्रा” में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में महिलाएं भाग लेंगी और कांग्रेस के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएंगी। “यह आक्रोश कांग्रेस के पतन की शुरुआत है और आने वाले चुनावों में इसका परिणाम स्पष्ट दिखाई देगा,” उन्होंने कहा। अंत में उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश की महिलाएं अब जागरूक हैं और अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं। “नारी शक्ति का यह जनसैलाब कांग्रेस को जवाब देगा और परिवर्तन की दिशा तय करेगा,” उन्होंने कहा।
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष रश्मि धर सूद ने महिला आरक्षण बिल गिरने को नारी शक्ति का अपमान बताते हुए कांग्रेस, सपा और टीएमसी पर महिलाओं के अधिकार कुचलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व देने का ऐतिहासिक अवसर था, जिसे विपक्ष ने मिलकर रोक दिया। “लड़की हूं, लड़ सकती हूं” जैसे नारों को खोखला बताते हुए उन्होंने कांग्रेस पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया और कहा कि ये दल केवल भाषणों में महिलाओं की बात करते हैं, जबकि हकीकत में उन्हें आगे बढ़ने से रोकते हैं। सूद ने दावा किया कि भाजपा महिलाओं को वास्तविक नेतृत्व के अवसर देती है और “जन आक्रोश रैलियां” इस बात का संकेत हैं कि महिलाएं अब अपने अधिकारों के लिए खुलकर सामने आ रही हैं, जो आने वाले समय में विपक्ष को जवाब देंगी। भाजपा विधायक रीना कश्यप ने कांग्रेस सरकार पर “जन आक्रोश महिला पदयात्रा” से घबराकर महिलाओं को शिमला पहुंचने से रोकने के लिए प्रशासन के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सोलन सहित विभिन्न क्षेत्रों से आ रही महिलाओं की बसों को जानबूझकर रोका गया, उन्हें घंटों तक रोके रखा गया और बाईपास मार्गों पर भेजा गया, जो उनकी आवाज दबाने की साजिश है। कश्यप ने इसे महिलाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए कहा कि सरकार महिला सशक्तिकरण की बातें तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उन्हें रोकती है। उन्होंने यह भी कहा कि तमाम बाधाओं के बावजूद महिलाओं की बड़ी भागीदारी यह दर्शाती है कि नारी शक्ति अब दबने वाली नहीं है और आने वाले समय में कांग्रेस को इसका जवाब मिलेगा।
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