
IBEX NEWS BUREAU, शिमला।
हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने राज्य की अफसरशाही की कमान आख़िरकार 1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस (IAS) और अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) कमलेश कुमार पंत को सौंप दी है।संजय गुप्ता की सेवानिवृत्ति के बाद कार्मिक विभाग की सचिव एम. सुधा देवी ने पंत की ताजपोशी के आदेश तो जारी कर दिए, लेकिन इस नियुक्ति ने प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर ‘एड-हॉक’ (कार्यवाहक) संस्कृति की बहस को हवा दे दी है।
सीनियरिटी लिस्ट में शीर्ष पर होने के बावजूद के.के. पंत को पूर्णकालिक (Regular) मुख्य सचिव बनाने के बजाय सिर्फ ‘एडिशनल चार्ज’ (अतिरिक्त कार्यभार) सौंपा गया है।

अनुभवी प्रशासनिक विश्लेषक इस फैसले को सरकार की हिचकिचाहट के रूप में देख रहे हैं।यह पहला मौका नहीं है ,इससे पहले पूर्व मुख्य सचिव संजय गुप्ता को भी अक्टूबर 2025 में कार्यवाहक जिम्मा दिया गया था और अपनी रिटायरमेंट से महज पांच दिन पहले ही वह रेगुलर चीफ सेक्रेटरी बन पाए थे।
वर्तमान में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) का संवेदनशील पद भी कार्यवाहक के भरोसे ही चल रहा है। सचिवालय से लेकर राजनीतिक हलकों में यह सवाल तैर रहा है कि जब के.के. पंत सीनियरिटी में सबसे आगे थे, तो उन्हें ‘अतिरिक्त प्रभार’ की बैसाखी क्यों दी गई? विपक्ष इस प्रशासनिक ढुलमुलपन को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
पैनल में थे ये बड़े नाम
पंत की नियुक्ति के साथ ही मुख्य सचिव की रेस में शामिल अन्य दिग्गजों के नाम पर भी विराम लग गया है. सीनियरिटी के पैनल में:
• 1994 बैच की आईएएस अनुराधा ठाकुर (नंबर दो पर)
• 1994 बैच के एसीएस ओंकार शर्मा (तीसरे नंबर पर)
• 1995 बैच के भरत हरबंसलाल खेड़ा (चौथे नंबर पर)
• 1995 बैच के एसीएस रावथेर दाउद नज़ीम (पांचवें नंबर पर) शामिल थे.
हालांकि, अनुराधा ठाकुर और भरत खेड़ा फिलहाल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में सेवाएं दे रहे हैं।
बड़ी प्रशासनिक ‘सर्जरी’ की आहट
के.के. पंत के मुख्य सचिव (एडिशनल चार्ज) बनते ही राज्य के प्रशासनिक ढांचे में बड़े फेरबदल की स्क्रिप्ट तैयार हो चुकी है।पंत अब तक फॉरेस्ट, होम और विजिलेंस जैसे बेहद महत्वपूर्ण और भारी-भरकम विभागों का जिम्मा संभाल रहे थे। अब इन विभागों को नए सिरे से बांटने के लिए नौकरशाही में भारी उठापटक तय मानी जा रही है।वहीं, सूत्रों के मुताबिक पांचवें नंबर के सीनियर अफसर आर.डी. नजीम भी जल्द केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जा सकते हैं, जिससे सचिवालय का समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा।




