
कठिनपरिस्थितियोंऔरसीमितसंसाधनोंकेबीचछिपीप्रतिभानेदेशकेसबसेबड़ेसार्वजनिकउपक्रममेंहासिलकियासर्वोच्चमुकाम; युवापीढ़ीकोदियाअनुशासनऔरस्वास्थ्यकासंदेश।अभाव को पछाड़ बैंगलोर में गाड़ा सफलता का झंडा
IBEX NEWS BUREAU,शिमला
अगर इरादों में फौलाद और हौसलों में हिमालय जैसी अडिगता हो, तो किस्मत को भी घुटने टेकने पड़ते हैं। भारत-चीन सीमा पर बसे देश के अंतिम जनजातीय गाँव छितकुलकिन्नौर के एक साधारण परिवार से निकले होनहार भुपिंदर सिंह नेगी ने वह कर दिखाया है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बन गया है। उन्होंने देश की महारत्न कंपनी स्टीलअथॉरिटीऑफइंडियालिमिटेड (SAIL) के सेंट्रल मार्केटिंग ऑर्गनाइजेशन (CMO) में जनरलमैनेजर (मार्केटिंगसर्विसेज) – WHM, बैंगलोर के सर्वोच्च और बेहद प्रतिष्ठित पद पर तैनात होकर पूरे हिमाचल और ट्राइबल समाज का मस्तक गर्व से ऊँचा कर दिया है।
बीती 30 जून 2026 को मिली इस ऐतिहासिक पदोन्नति के साथ ही वे अब शीर्ष प्रशासनिक वेतनमान में अपनी सेवाएँ देकर देश के औद्योगिक विकास में अपनी बड़ी भूमिका निभाएंगे।
उनकी यह कामयाबी इसलिए बेहद खास है क्योंकि उनका शुरुआती सफर बेहद चुनौतीपूर्ण और संघर्षपूर्ण रहा। एक बेहद साधारण और आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवार में जन्मे इस होनहार को जीवन की हर छोटी-बड़ी चीज़ के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी।
उनकी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा (कक्षा छठी तक) छितकुल और सांगला के सरकारी स्कूलों में हुई। इसके बाद, अपनी प्रतिभा के दम पर उन्होंने विवेकानंद केंद्र विद्यालय (VKV) गाजियाबाद से पढ़ाई की। शिक्षा के प्रति उनके इसी जुनून ने उन्हें पुणे यूनिवर्सिटी से बी.ई. (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) और देश के प्रतिष्ठित वेलिंगकर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (मुंबई) से ‘MBA मार्केटिंग’ की डिग्री तक पहुँचाया। IBEX NEWS से विशेष बातचीत में भूपिंदर सिंह ने बताया कि अपनी इस अटूट सफलता का श्रेय वे अपने गाँव के उन दिग्गजों को देते हैं जिन्होंने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की राह दिखाई। वे बताते हैं किके. एल. नेगी, टी. एस. नेगी, एम. बी. नेगीऔरडॉ. आर. एस. नेगी जैसे प्रबुद्ध व्यक्तित्व के जीवन ने उन्हें हमेशा प्रेरित किया।
भारत चीन सुदूर सीमावर्ती ट्राइबल गाँव से निकलकर उन्होंने देश के बड़े महानगरों और औद्योगिक केंद्रों जैसे दुर्गापुर, देहरादून, दिल्ली, गाजियाबाद, मुंबई, कोलकाता और अब बैंगलोर में विभिन्न उच्च पदों पर काम किया है। इस दौरान उन्होंने उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक पूरे भारत का भ्रमण किया और व्यावहारिक अनुभव हासिल किया। आज उनकी इसी कड़ी मेहनत और अनुशासन की बदौलत उनका परिवार समाज में एक बेहद सम्मानित और सुदृढ़ स्थान पर है।देश और समाज को बहुत करीब से देखने के बाद उनका मानना है कि—“जोसमाजअपनेलोगोंकीमददऔरसहयोगकरतेहैं, वेहीतेजीसेप्रगतिकरतेहैं।“ उन्होंने अपने समाज के सभी प्रबुद्ध सदस्यों से अपील की है कि वे समाज की छिपी हुई योग्यता और मेधावी युवाओं (Merit) को आगे बढ़ने में पूरा सहयोग दें, क्योंकि यही प्रतिभाएँ आगे चलकर पूरे समाज का गौरव बनती हैं।युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि अनुशासन, कड़ी मेहनत, स्मार्ट तरीके से काम करना और अच्छा स्वास्थ्य सफलता की सबसे बड़ी कुंजी हैं। उन्होंने कहा, “अनुशासन लक्ष्य और उपलब्धि के बीच की सबसे मजबूत कड़ी है” तथा “जिसके पास स्वास्थ्य है, उसके पास आशा है और जिसके पास आशा है, उसके पास सब कुछ है।”
भूपिंदर नेगी की यह उपलब्धि किन्नौर और हिमाचल प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो सीमांत गांव से निकलकर भी देश के सर्वोच्च संस्थानों में अपनी पहचान बनाई जा सकती है।


