
कॉरपोरेशन के पूर्व एमडी हरिकेश मीणा की अंतरिम जमानत हाईकोर्ट ने बरकरार रखी ,19 मई को मामले की अगली सुनवाई ।IBEX NEWS,शिमला ।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पावर कॉरपोरेशन के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की मौत से जुड़े मामले में बड़ा ख़ुलासा हुआ है पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है कि स्वर्गीय विमल नेगी का फ़ोन मिल गया है और आगामी जाँच के लिए गठित पुलिस टीम ने राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला जुन्गा भेजा है ।तब तक पुलिस ने इस संबंध में कुछ भी जानकारी देने से हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष असमर्थता जाहिर की है ।हालांकि पेन ड्राइव के बारे में पुलिस ने कोई जानकारी साझा नहीं की । न ही इस पूरे मामले की अपडेटेड दूसरी कोई स्टेटस रिपोर्ट दी ।ये भी खुलासा नहीं किया है कि कब ,कहाँ और कैसे स्वर्गीय विमल नेगी का फ़ोन पुलिस को मिला ।हालांकि पिछली सुनवाई में पुलिस ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में ये जानकारी साझा की थी कि पुलिस ने मृतक विमल नेगी के फोन को खोजने के लिए गोबिंदसागर झील में गोताखोर उतारे हैं। पुलिस को उम्मीद है कि विमल नेगी का मोबाइल उनकी मौत के कई राज खोल सकता है। गुरुवार को कॉरपोरेशन के पूर्व एमडी हरिकेश मीणा की अंतरिम जमानत को लेकर अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस ने मौखिक तौर पर ये तथ्य सामने रखे ।इस केस की अगली तारीख़ अब 19 मई सूचीबद्ध हुई है और तब तक पूर्व एमडी हरिकेश मीणा की की की अंतरिम जमानत तब तक ज्यों की त्यों बरकरार रखी गई है ।उन्होंने हाईकोर्ट में गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दायर कर रखी है।कोर्ट ने मीणा की गिरफ्तारी पर रोक को आगे बढ़ाते हुए 15 मई तक अंतरिम जमानत प्रदान की थी । इस प्रकरण में गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने हाईकोर्ट में केस से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट पेश की थी ।इससे पहले 8 अप्रैल को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने मीणा को 2 मई तक की अंतरिम जमानत दी थी।।
दीगर हो कि प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता आर.के. बावा की अगुवाई में राजीव रॉय, चमन नेगी, अधिवक्ता विवेकानंद नेगी मामले की पैरवी कर रहे हैं ।उधर उप पुलिस अधीक्षक (शहर) शिमला की और से अदालत में कहा गया कि IAS याचिकाकर्ता को उसकी आधिकारिक स्थिति और संसाधनों तक पहुंच को देखते हुए गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने से रोकने के लिए अग्रिम जमानत न देने की अपील कर चुके हैं ।इस तर्क के साथ कि याचिकाकर्ता की हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता है, क्योंकि अगर वह फरार रहता है तो उसके प्रभाव और अधिकार का इस्तेमाल न्याय की प्रक्रिया में बाधा डालने के लिए किया जा सकता है। जांच अभी प्रारंभिक चरण में है, और महत्वपूर्ण साक्ष्य अभी तक सामने नहीं आए हैं। एक आईएएस अधिकारी के रूप में याचिकाकर्ता की प्रभावशाली स्थिति को देखते हुए, अग्रिम जमानत के सुरक्षात्मक कवच के तहत उनकी निरंतर स्वतंत्रता जांच में बाधा उत्पन्न कर सकती है। पुलिस को याचिकाकर्ता की भूमिका की पूरी सीमा का पता लगाने, उसके विरोधाभासी बयानों के पीछे की सच्चाई को उजागर करने और ईओटी निर्णय और विमल नेगी की मृत्यु में परिणत होने वाली घटनाओं के बीच संबंध, यदि कोई हो, उसका पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता है।पुलिस ने अदालत में बताया है कि विमल नेगी के लापता होने के बाद याचिकाकर्ता के आचरण पर संदेह उत्पन्न कर रहा है जो पूर्व ज्ञान या संलिप्तता का संकेत दे सकती है।
इस बाबत पुलिस ने हाई कोर्ट में प्रार्थना की कि पुलिस को मिले तथ्यों और परिस्थितियों के मद्देनजर मामले में याचिकाकर्ता की संलिप्तता को लेकर प्रथम दृष्टया सबूत मिल रहे हैं । उसकी प्रभावशाली स्थिति, टालमटोल वाला आचरण और जांच के शुरुआती चरण को देखते हुए, याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत देने से चल रही जांच पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और न्याय के उद्देश्यों को नुकसान पहुंचेगा।गौर हो कि न्यू शिमला थाना में डायरेक्टर देसराज, एमडी और डायरेक्टर (पर्सनल) के खिलाफ FIR की गई है। अब तक की पुलिस और अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा की जांच में परिजनों द्वारा लगाए आरोप सही पाए गए हैं।इससे इन तीनों अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
बता दें कि बीते 10 मार्च को विमल नेगी दफ्तर से घर जाने के बजाय टैक्सी में बिलासपुर चले गए थे। 18 मार्च को गोविंद सागर झील में उनका शव मिला था। 19 को एम्स बिलासपुर में पोस्टमॉर्टम करवाया गया। इसी दिन परिजनों ने पावर कॉरपोरेशन दफ्तर बीसीएस के बाहर शव के साथ प्रदर्शन किया। इसके बाद ही इस मामले में एफआईआर की गई और देसराज को सस्पेंड किया गया और डायरेक्टर (पर्सनल) को सरकार ने HPPCL से ट्रांसफर किया है ।
सूत्र बताते हैं कि विमल नेगी के परिजनों ने जाँच कर रहे पुलिस के बड़े आला अधिकारी से एक फोटो साझा की और तस्वीर उस दिन की थी जिस दिन विमल नेगी की लाश को पुलिस ने भाखड़ा से बरामद किया था। तस्वीर में मोबाइल फोन तो विमल नेगी की जेब में साफ दिख रहा था । तो जांच टीम की जांच की सूई फोन की और घूम गई । 18 मार्च को जिस दिन विमल नेगी की लाश भाखड़ा बांध से मिली थी उसी दिन से विमल नेगी का मोबाइल पुलिस रहस्यमय तरीके से पुलिस की आंखों से दूर हो गया था।मोबाइल फोन को इस तरह सामने आना कई सवाल खड़ा कर रहा है। आखिर पुलिस को पहले मोबाइल क्यों नहीं मिला? क्या जानबूझ कर मोबाइल को गायब कर दिया?और जब अब मिला है तो ये कहां से मिला हैं?पुलिस ने इस जानकारी को साझा करने से परहेज किया कि आगामी जाँच इससे प्रभावित हो सकती है ।
विमल नेगी के परिजनों ने प्रदेश हाईकोर्ट में सीबीआइ जांच की मांग को लेकर याचिका दायर की हैं।इस मामले में नेगी के परिजनों और पावर कारपोरेशन के अलावा बिजली बोर्ड के कर्मचारियों की ओर से दावा किया जा रहा है कि विमल नेगी की या तो हत्या की गई है या उन्हें आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया हैं।जिस तरह से अचानक से पुलिस ने विमल नेगी के मोबाइल को सामने लाया है, वो कई सवालों को खड़ा कर रहा हैं।




