
- झलारू सड़क हादसे ने तीन परिवारों से छीना सहारा, सराज में पसरा सन्नाटा
IBEX NEWS,शिमला ।
रविवार रात जंजैहली-छतरी मार्ग पर झलारू के समीप जो कुछ हुआ, उसने न सिर्फ तीन घरों के चूल्हे बुझा दिए, बल्कि पूरे सराज क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया। करसोग से सेब सीजन की मजदूरी पूरी कर लौट रहे पांच युवकों की ऑल्टो कार मगरुगला के पास अचानक अनियंत्रित होकर करीब 300 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में तीन युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। देवदत्त, मंगल चंद और यशवंत सिंह इन तीनों के सिर पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। खेतों की मेड़ से उठकर सेब के बागानों में पसीना बहाने वाले ये युवक अपने घरों में रौशनी लेकर लौट रहे थे, लेकिन अब वे कफन ओढ़कर लौटे हैं।
रातभर पड़ी रही लाशें, चीखें गूंजीं – लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था
हादसा रात के अंधेरे में हुआ। गाड़ी खाई में गिरी तो चीख-पुकार मची, लेकिन घने जंगल और वीरान सड़क पर कोई मदद को नहीं पहुंचा। पूरी रात घायल खाई में पड़े रहे — मदद की आस में, दर्द की चुप्पी में।
सुबह जब आंख खुली तो सिर्फ गुमान सिंह, जो कि चालक था, किसी तरह रेंगता हुआ सड़क तक पहुंचा। खून से लथपथ, कांपता हुआ, टूटे शब्दों में मदद मांगता, वह जिंदा लोगों की अंतिम उम्मीद बना।
स्थानीय चालक तारा चंद ने उसे देखा और तुरंत प्रशासन को सूचना दी। इसके बाद ही राहत कार्य शुरू हुआ।
टूटी सड़क और लापरवाही बनी जानलेवा
हादसे की वजह महज़ बारिश नहीं थी — बल्कि वो टूटी हुई सड़क, धंसा हुआ डंगा और प्रशासन की लापरवाही थी। जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां सड़क का हिस्सा ही गायब था, कोई चेतावनी चिन्ह, कोई बैरिकेड तक नहीं था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सड़क की मरम्मत समय पर होती, तो शायद ये मासूम ज़िंदगियां बच सकती थीं।
परिजनों का कहना है –
हमारे बेटों को सड़क ने निगल लिया। कौन जवाब देगा? अब न सिर्फ दुख है, बल्कि रोज़ी-रोटी का भी संकट है।परिवारों ने प्रशासन से दोषियों पर कार्रवाई और उचित मुआवज़े की मांग की है।स्थानीय प्रशासन द्वारा जांच और राहत की प्रक्रिया शुरू की गई है, लेकिन सवाल अब भी लटके हैं —कब तक टूटी सड़कें जान लेंगी? कब तक गरीब मज़दूरों की मौत पर रिपोर्टें बनेंगी?




