
IBEX NEWS,शिमला/नाहन
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के सीमांत क्षेत्र शिलाई के पशमी गांव में चालदा महासू महाराज के आगमन के साथ एक महत्वपूर्ण धार्मिक-सांस्कृतिक अध्याय का शुभारंभ हुआ है। महासू देवता, जो उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र से लेकर हिमाचल के सीमावर्ती इलाकों तक पूजे जाते हैं, का यह प्रवास न केवल स्थानीय आस्था का विषय है, बल्कि पहाड़ी लोक-देवता परंपरा के अध्ययन के लिए भी एक मील का पत्थर है।चालदा महासू महाराज को इस क्षेत्र की समृद्ध देव संस्कृति में एक विशेष स्थान प्राप्त है। ये ‘न्याय के देवता’ और भगवान शिव के अंश माने जाते हैं। महासू देवताओं की चार भाईयों वाली परंपरा में, ‘चालदा’ (चलायमान) महासू का प्रवास एक निर्धारित चक्र के तहत होता है, जो इन्हें अन्य स्थिर (थांदार) देवताओं से अलग करता है।ऐतिहासिक रूप से, महासू देवता के प्रवास पहाड़ी रियासतों और ठकुराइयों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को दर्शाते रहे हैं। इनका आगमन स्थानीय समुदायों के लिए एक धार्मिक अनुष्ठान से कहीं अधिक, सामुदायिक एकजुटता और लोक आस्था के पुनर्जीवन का प्रतीक होता है।जौनसार से 70 किमी की पदयात्रा के बाद चालदा महासू महाराज ने टौंस नदी पार कर पहली बार हिमाचल के सिरमौर में प्रवेश किया ।पश्मी गांव में देव आगमन को लेकर भारी आस्था का सैलाब उमड़ा है।चालदा महासू महाराज की यह पदयात्रा 8 दिसंबर 2025 को उत्तराखंड के हनोल क्षेत्र से शुरू हुई थी।यह यात्रा दुर्गम पहाड़ी रास्तों, जंगलों और नदियों को पार करते हुए सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र तक पहुंची।भारी जनसैलाब के कारण देवता को उत्तराखंड से हिमाचल सीमा में प्रवेश करने में करीब एक घंटे का समय लगा।पश्मी और घासन गांव के लोगों ने मिलकर लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से भव्य मंदिर का निर्माण किया है।पश्मी गांव के 45 और घासन गांव के 15 परिवारों ने इस मंदिर निर्माण में अहम योगदान दिया है।पश्मी गांव में महासू महाराज के आगमन की नींव 5 साल पहले ही पड़ चुकी थी।वर्ष 2020 में जौनसार क्षेत्र के दसऊ गांव से एक विशाल बकरा, जिसे स्थानीय भाषा में ‘घांडुआ’ कहा जाता है, अचानक पश्मी गांव आकर रुक गया था ।दो वर्षों तक ग्रामीण उसे सामान्य पशु मानते रहे।लेकिन 2022 में देव वक्ता के माध्यम से बताया गया कि यह देवता का दूत है, जो देव प्रवास से पहले संकेत के रूप में भेजा जाता है।
मान्यता के अनुसार महासू देवता भगवान शिव और माता पार्वती के अंश से उत्पन्न चार भाइयों बासिक, बोथा, पवासी और चालदा महासू का समूह हैं।ये देवता उत्तराखंड और हिमाचल दोनों क्षेत्रों में न्याय और रक्षा के लिए पूजे जाते हैं। कहा जाता है कि उन्होंने राक्षस किरमिक का वध कर क्षेत्र में शांति स्थापित की थी।
महासू देवता का मुख्य मंदिर उत्तराखंड के हनोल में स्थित है, जहां अखंड ज्योति जलती रहती है और एक रहस्यमयी जलधारा निकलती है। यहां आज भी हर साल राष्ट्रपति भवन से नमक भेजा जाता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है, जब पहले ब्रिटिश वायसराय और अब राष्ट्रपति अपनी मन्नत पूरी होने पर न्याय के देवता महासू को नमक अर्पित करते हैं।यह परंपरा आस्था, विश्वास और न्याय की प्रतीक मानी जाती है।

पंडित आत्माराम शर्मा करेंगे पूजा
चालदा महासू महाराज के पश्मी गांव में देव कार्य तथा भंडारे के लिए श्री महासू महाराज कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी में दिनेश चौहान को बजीर और रघुवीर सिंह को भंडारी नियुक्त किया गया है। जबकि मंदिर में पूजा की जिम्मेवारी पंडित आत्माराम शर्मा को सौंप गई है।
उद्योग, संसदीय मामले मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने सपरिवार पशमी मंदिर में शीश नवाकर महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंत्री ने बताया कि गत दो दिनों में लगभग 01 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने इस समारोह में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जो देव शक्ति के प्रति इस क्षेत्र की अविचल आस्था का स्पष्ट प्रमाण है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि डिजिटल युग में भी सदियों पुरानी लोक-देवता परंपराएँ जनमानस में कितनी गहरी जड़ें जमाए हुए हैं
मंत्री चौहान ने मंदिर समिति और शिलाई क्षेत्र, विशेषकर पशमी गांव के लोगों को, इस विशाल और सफल आयोजन के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि लोगों ने पूर्ण श्रद्धा और भक्तिभाव से महाराज का स्वागत किया।


यह महत्वपूर्ण है कि चालदा महासू महाराज अगले एक वर्ष तक पशमी में विराजमान रहेंगे। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह प्रवास इस दुर्गम क्षेत्र के लिए धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बनेगा।
उन्होंने कहा, “महाराज के दर्शन के लिए भारी संख्या में भक्तों के आने से न केवल क्षेत्र में धार्मिक चेतना बढ़ेगी, बल्कि यह स्थानीय लोगों की आर्थिक गतिशीलता को भी बल देगा, जिससे इलाके में खुशहाली आएगी।” इस प्रकार, यह धार्मिक घटना क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकासकी एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है।

इस अवसर पर अध्यक्ष मार्केटिंग कमेटी सीता राम शर्मा, एसडीएम शिलाई जसपाल, महासू महाराज पश्मी मंदिर समिति के अध्यक्ष प्रकाश, बारू राम डिमेदार, महासू महाराज भंडारी रघुवीर सिंह सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे, जो क्षेत्र की धार्मिक-सामाजिक नेतृत्व संरचना की उपस्थिति को प्रदर्शित करता है।





