
AITP की अवधि 12 से 15 वर्ष, मोबाइल फिटनेस ऐप, ई-डिटेक्शन और ATS से बदलेगा सिस्टम; 3 साल में ₹2744 करोड़ की आय
परिवहन विभाग में ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत: फेसलेस परमिट और ऑटो-अप्रूवल से बदली व्यवस्था
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने पत्रकार वार्ता में कहा—‘अब ऑटोमेशन का दौर, सेवाएं होंगी तेज, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त’
IBEX NEWS,शिमला।
हिमाचल प्रदेश का परिवहन विभाग अब पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ चुका है। विभाग ने फेसलेस परमिट, ऑटो-अप्रूवल मैकेनिज्म और ई-प्रवर्तन प्रणाली लागू कर ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत की है। सरकार का दावा है कि इन सुधारों के चलते विभागीय राजस्व में पिछले तीन वर्षों में लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में परिवहन विभाग में एक ऐतिहासिक परिवर्तन की शुरुआत हो चुकी है। अब विभाग में ऑटोमेशन का युग आ चुका है, और आज वह घोषणा धरातल पर साकार होती दिखाई दे रही है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश का परिवहन विभाग अब डिजिटल गतिविधियों के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। विभाग की परमिट सेवाएं अब बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के, यानी फेसलेस व्यवस्था के अंतर्गत संचालित की जा रही हैं। कई सेवाओं में ऑटो-अप्रूवल सिस्टम लागू कर दिया गया है, जिससे नागरिकों को तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद सेवाएं मिल रही हैं।
उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य परिवहन सेवाओं को पूरी तरह तकनीक आधारित, सरल और जवाबदेह बनाना है, ताकि वाहन मालिकों और आम नागरिकों को RTO कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। नई व्यवस्था से समय की बचत होगी और प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी बनेंगी।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि विभाग में लागू की गई डिजिटल प्रणालियों से न केवल कार्यप्रणाली में सुधार आया है, बल्कि राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। फेसलेस परमिट, ई-नीलामी, ऑटो-अप्रूवल और डिजिटल प्रवर्तन प्रणाली जैसे कदम विभागीय सुधारों की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।
3 साल में ₹2744 करोड़ राजस्व
जनवरी 2023 से 23 फरवरी 2026 तक परिवहन विभाग ने विभिन्न स्रोतों से ₹2744.02 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जबकि पिछली समान अवधि में यह आंकड़ा ₹1564.76 करोड़ था। यानी करीब ₹1180 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।
ई-नीलामी के जरिए फैंसी नंबरों से भी सरकार को उल्लेखनीय आय हुई है। 1 जनवरी 2023 से 23 फरवरी 2026 तक ई-नीलामी से ₹80.82 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। विशेष पंजीकरण संख्या 0001 को भी ऑनलाइन नीलामी के लिए खोला गया, जिससे अब तक ₹4.44 करोड़ की आय हुई।

AITP परमिट की अवधि अब 15 वर्ष
केंद्र सरकार ने 13 फरवरी 2026 को All India Tourist Permit (AITP) की अवधि 12 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दी है। इस फैसले से प्रदेश के टैक्सी ऑपरेटरों को सीधा लाभ मिलेगा। यह निर्णय लंबे समय से लंबित मांग पर लिया गया है।
ऑटो-अप्रूवल और फेसलेस सिस्टम लागू
Goods Carriage, National Permit, Contract Carriage और Tourist Permits सहित कई सेवाओं में दस्तावेज पूरे होने पर स्वचालित मंजूरी दी जा रही है। इससे RTO कार्यालयों के चक्कर कम होंगे और सेवाएं तेज व पारदर्शी होंगी।
मोबाइल फिटनेस ऐप और ई-डिटेक्शन सिस्टम
वाहन फिटनेस को डिजिटल बनाने के लिए मोबाइल फिटनेस ऐप शुरू किया गया है, जिससे मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर GPS और फोटो साक्ष्य के साथ जांच कर रहे हैं।
साथ ही, टोल प्लाजा पर e-Detection System और Intelligent Transport Management System (ITMS) लागू किया गया है। POS आधारित ई-चालान प्रणाली से मौके पर ही डिजिटल चालान और ऑनलाइन भुगतान संभव हो रहा है।
प्रदेश में बनेंगे ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS)
हरोली (ऊना) और नादौन (हमीरपुर) में ATS निर्माण प्रगति पर है। इसके अलावा बिलासपुर, रणीताल (कांगड़ा), कांगू (मंडी), नालागढ़ (सोलन) और पांवटा साहिब (सिरमौर) में भी ATS स्थापित किए जा रहे हैं।
इसके लिए केंद्र से Special Central Assistance के तहत ₹25 करोड़ प्राप्त हुए हैं, जिनमें से ₹23.50 करोड़ Himachal Road Transport Corporation को इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए जारी किए गए हैं।
RVSF से वैज्ञानिक स्क्रैपिंग
राज्य में Registered Vehicle Scrapping Facility (RVSF) स्थापित होने के बाद अब पुराने वाहनों की वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीके से स्क्रैपिंग की जा रही है। इससे प्रदूषण नियंत्रण और सड़क सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
ड्राइविंग लाइसेंस और मेडिकल सिस्टम होगा ऑनलाइन
भविष्य में मेडिकल सर्टिफिकेट सीधे अधिकृत डॉक्टरों द्वारा ‘सारथी पोर्टल’ पर अपलोड किए जाएंगे, जिससे फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगेगी और लाइसेंस नवीनीकरण प्रक्रिया और पारदर्शी होगी।
साथ ही, सेंसर आधारित ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक भी स्थापित किए जा रहे हैं, जहां निष्पक्ष और तकनीकी मूल्यांकन होगा।
जल परिवहन को भी मिलेगा बढ़ावा
23 जनवरी 2026 को Inland Waterways Authority of India और हिमाचल प्रदेश सरकार के बीच State Support Agreement पर हस्ताक्षर हुए हैं। इससे सतलुज नदी के गोविंद सागर झील क्षेत्र में जल परिवहन परियोजनाओं को तकनीकी और वित्तीय सहयोग मिलेगा।
परिवहन विभाग का लक्ष्य स्पष्ट है—पूरी तरह ऑटोमेटेड, तकनीक आधारित, भ्रष्टाचार मुक्त और नागरिक अनुकूल व्यवस्था। आने वाले समय में वाहन पंजीकरण भी डीलर स्तर पर करने की तैयारी है, जिससे वाहन खरीदते ही स्थायी रजिस्ट्रेशन की सुविधा मिल सकेगी।
प्रदेश में परिवहन व्यवस्था का यह डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन आने वाले वर्षों में प्रशासनिक सुधारों की नई मिसाल बन सकता है।




