हिमाचल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने दो टूक चेताया है कि भारत सरकार के इस निर्णय में हिमाचल प्रदेश को लपेटने जायज नहीं है
IBEX NEWS,शिमला/धर्मशाला:
हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े जिले कांगड़ा में वाहनों के फिटनेस टेस्ट को लेकर बड़ा प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा मैनुअल फिटनेस टेस्ट की सुविधा को बंद करने के फैसले के बाद हिमाचल सरकार ने अब केंद्र को पत्र लिखकर इस पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।गौरतलब है कि
भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक आदेश जारी किया है, जिसके तहत 1 अप्रैल, 2026 से कांगड़ा जिले के 14 RTO/RLA केंद्रों में मैनुअल फिटनेस टेस्ट और ‘परिवहन’ पोर्टल का एक्सेस बंद कर दिया गया है। केंद्र का तर्क है कि नियम 62 के तहत अब फिटनेस टेस्ट केवल ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) के जरिए ही होने चाहिए।

जनता की बढ़ी मुश्किलें: केवल एक ही सेंटर के भरोसे पूरा जिला
हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) आर.डी. नज़ीम ने केंद्र सरकार को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि कांगड़ा जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले जिले में केवल एक ऑपरेशनल ATS (SA एसोसिएट्स) होना काफी नहीं है। इससे वाहन मालिकों को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है:
• लंबी दूरी: दूरदराज के इलाकों से केवल एक सेंटर तक पहुंचना मुश्किल और खर्चीला है।
• भारी भीड़: हजारों वाहनों के लिए एक ही सेंटर होने से भारी देरी और कंजेशन हो रहा है।
• आजीविका पर संकट: कमर्शियल वाहन चालकों को समय पर फिटनेस सर्टिफिकेट न मिलने से उनके काम पर असर पड़ रहा है।
हड़ताल और कानून-व्यवस्था की चेतावनी
हिमाचल सरकार ने केंद्र को आगाह किया है कि इस फैसले से ट्रांसपोर्ट यूनियनों में भारी आक्रोश है। यूनियनों ने चक्का जाम और विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है, जिससे आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई और आम जनता की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
प्रदेश सरकार की मांग: 6 महीने की मोहलत
हिमाचल सरकार ने मांग की है कि:
1. कांगड़ा जिले में मैनुअल फिटनेस टेस्ट की व्यवस्था को कम से कम 6 महीने के लिए फिर से बहाल किया जाए।
2. जब तक अन्य ATS सेंटर पूरी तरह काम करना शुरू नहीं कर देते, तब तक पुरानी और नई दोनों व्यवस्थाएं साथ-साथ चलाई जाएं।

प्रदेश का सबसे बड़ा जिला होने के कारण कांगड़ा में वर्तमान में मात्र एक ATS स्टेशन के माध्यम से सभी वाहनों की फिटनेस जांच करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है विशेषकर पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए।
प्रदेश सरकार ने इस विषय की गंभीरता को समझते हुए तुरंत 04 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार से पत्राचार कर फिलहाल पुरानी मैन्युअल व्यवस्था को जारी रखने का आग्रह किया है यह पत्र उसी प्रयास का प्रमाण है।
प्रदेश सरकार कांगड़ा के ट्रांसपोर्टरों के साथ मजबूती से खड़ी है और उनकी इस जायज़ मांग को लेकर प्रतिबद्ध है, ताकि जिले में पर्याप्त संख्या में ATS स्थापित होने तक पुरानी व्यवस्था को बरकरार रखा जा सके।
भारत सरकार के इस निर्णय में हिमाचल प्रदेश को लपेटने जायज नहीं है।




