
नाबालिग बालिका से गंभीर यौन अपराध के मामले में दोषसिद्धि, अदालत ने लगाया जुर्माना भी
IBEX NEWS BUREAU,शिमला, 4 जून। जिला शिमला पुलिस की प्रभावी जांच और अभियोजन पक्ष की सशक्त पैरवी के चलते POCSO अधिनियम के एक गंभीर मामले में आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। माननीय फास्ट ट्रैक कोर्ट शिमला ने नाबालिग बालिका के साथ गंभीर यौन अपराध के मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 7 दिसंबर 2024 को पुलिस थाना जुब्बल में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65 तथा POCSO अधिनियम की धारा 6 के तहत मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में एक नाबालिग बालिका के साथ गंभीर यौन अपराध किए जाने के आरोप लगाए गए थे।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा एवं गोपनीयता सुनिश्चित की। जांच के दौरान पीड़िता का बयान विधि अनुसार दर्ज किया गया तथा चिकित्सीय, वैज्ञानिक, परिस्थितिजन्य और तकनीकी साक्ष्य एकत्रित कर मामले की गहन जांच की गई।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर समयबद्ध तरीके से न्यायालय में मजबूत आरोप पत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान पुलिस और अभियोजन पक्ष ने समन्वित प्रयासों से साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष रखा।
मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट शिमला ने 3 जून 2026 को आरोपी अंशुल पुत्र केवल राम, निवासी तहसील जुब्बल, जिला शिमला को दोषी करार दिया।
अदालत ने दोषी को POCSO अधिनियम की धारा 6 के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास तथा 5,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में दोषी को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
जिला शिमला पुलिस ने कहा है कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों के प्रति उसकी शून्य सहनशीलता नीति जारी रहेगी तथा पीड़ितों को न्याय दिलाने और दोषियों को कानून के कठघरे तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।



