
IBEX NEWS,शिमला
हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी को मजबूत करने की रीढ़ हमेशा से कृषि और बागवानी रही है। राज्य की अधिकांश आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन्हीं क्षेत्रों पर निर्भर है,ऐसे में कृषि एवं बागवानी क्षेत्र को नीति और बाज़ार से जोड़ने की दिशा में कृषि एवं बागवानी आयोग की स्थापना एक दूरदर्शी और ऐतिहासिक कदम है। माननीय मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू जी द्वारा पूर्ण राज्यत्व दिवस पर की गई यह घोषणा केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि ग्रामीण हिमाचल की आर्थिकी को स्थायी,सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की ठोस पहल है। यह आयोग किसानों और बागवानों की ज़मीनी समस्याओं, उत्पादन लागत, विपणन, मूल्य स्थिरता, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव तथा आधुनिक तकनीकों के समावेशन पर समग्र दृष्टि से काम करेगा।
हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की नींव कृषि, बागवानी और पशुपालन पर टिकी है। प्रदेश में सेब का सालाना कारोबार लगभग 5000 करोड़ का है, वहीं 70 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या प्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। ऐसे में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक और ठोस नीतियों की आवश्यकता थी, जिसे सुक्खू सरकार ने गंभीरता से समझा और ज़मीन पर उतारा है।
अब तक किसान और बागवान बिखरी हुई नीतियों, अस्थिर बाज़ार और बिचौलियों की समस्या से जूझते आ रहे हैं। आयोग की स्थापना से नीति निर्माण, शोध, नवाचार और क्रियान्वयन एक ही मंच पर संभव हो सकेगा। इससे पारंपरिक खेती के साथ-साथ प्राकृतिक खेती और निर्यात की नई संभावनाएँ भी खुलेंगी।
यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं के लिए आशा की किरण है, कृषि एवं बागवानी को लाभकारी और सम्मानजनक आजीविका के रूप में स्थापित कर यह आयोग पलायन रोकने में भी अहम भूमिका निभा सकता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने,किसानों-बागवानों की आय बढ़ाने और हिमाचल की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप नीतियाँ गढ़ने की दिशा में यह निर्णय मील का पत्थर साबित होगा। इस दूरदर्शी और जनहितकारी निर्णय के लिए माननीय मुख्यमंत्री का हार्दिक आभार एवं अभिनंदन।
निस्संदेह,कृषि एवं बागवानी आयोग हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। प्रदेश सरकार ने किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए दूध पर समर्थन मूल्य में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है। गाय के दूध का समर्थन मूल्य 32 रुपये से बढ़ाकर 51 रुपये प्रति लीटर तथा भैंस के दूध का मूल्य 47 रुपये से 61 रुपये प्रति लीटर पहले ही किया गया है। यह कदम हिमाचल को दूध पर सबसे अधिक समर्थन मूल्य देने वाला देश का पहला राज्य बनाता है।
इतना ही नहीं,दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों की वास्तविकताओं को समझते हुए सरकार ने 2 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी तक स्वयं दूध ले जाने पर 3 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी का प्रावधान किया है। यह निर्णय छोटे और सीमांत पशुपालकों को सीधा लाभ पहुँचाने वाला है, जिससे उनकी मेहनत का उचित मूल्य सुनिश्चित हो सके।
सेब,दुग्ध और कृषि आधारित आय में स्थिरता आने से ग्रामीण परिवारों की क्रय शक्ति बढ़ेगी,स्थानीय रोज़गार को बल मिलेगा और पलायन जैसी गंभीर समस्या पर भी अंकुश लगेगा। सुक्खू सरकार की ये नीतियाँ यह स्पष्ट करती हैं कि राज्य की विकास रणनीति का केंद्र किसान, बागवान और पशुपालक हैं।
निस्संदेह,यह प्रयास हिमाचल प्रदेश को एक मज़बूत,आत्मनिर्भर और टिकाऊ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने वाला हैं,इसके लिए माननीय मुख्यमंत्री सराहना एवं आभार के पात्र हैं।



