
IBEX NEWS BUREAU
शिमला, 16 अप्रैल।
पद्मश्री से सम्मानित और रेबीज के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ डॉ. ओमेश भारती को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें WHO के मलेरिया और उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (NTD) विभाग की पर्यवेक्षी समिति का सदस्य नामित किया गया है।
यह 18 सदस्यीय समिति विभाग के कार्यक्रमों के मध्यावधि मूल्यांकन का कार्य करेगी। डॉ. भारती को इसमें उपेक्षित पशुजन्य रोगों के स्वतंत्र विशेषज्ञ के रूप में शामिल किया गया है।
WHO के अनुसार, इस मूल्यांकन का उद्देश्य यह आकलन करना है कि NTD (NTD stands for Neglected Tropical Diseases) रोडमैप 2021–2030 के तहत चल रहे कार्यक्रम कितनी प्रगति कर रहे हैं और क्या वे 2030 तक अपने लक्ष्यों को हासिल कर पाएंगे? यह समिति मूल्यांकन प्रक्रिया को निष्पक्ष, विश्वसनीय और उपयोगी बनाने के लिए रणनीतिक और तकनीकी मार्गदर्शन सुनिश्चित करेगी।
डॉ. भारती पहले से ही रेबीज और सर्पदंश पर WHO के विशेषज्ञ पैनल और राष्ट्रीय कार्य बल के सदस्य हैं। उनका कहना है कि इस समिति में भारत की भागीदारी से NTD रोडमैप से जुड़े फैसलों में देश की भूमिका और मजबूत होगी।
डॉ. भारती को वर्ष 2019 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उन्हें कुत्ते के काटने पर इलाज के लिए विकसित किफायती प्रोटोकॉल के लिए मिला था जिसे WHO ने 2018 में अपने वैश्विक दिशानिर्देशों में शामिल किया था। वर्तमान में डॉ. भारती राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के उपनिदेशक का कार्यभार देख रहे हैं और सर्पदंश पर विस्तृत शोध कार्य कर रहे हैं।
डॉ. भारती के शोध से पहले, रेबीज का उपचार आम आदमी की पहुंच से बाहर था। उन्होंने Intradermal (त्वचा के भीतर) और Local Infiltration की तकनीक पर शोध किया। पारंपरिक रूप से ‘रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन’ (RIG) को मरीज के वजन के अनुसार शरीर के विभिन्न हिस्सों में मांसपेशियों में लगाया जाता था। डॉ. भारती ने सिद्ध किया कि यदि RIG को केवल घाव के चारों ओर (Wound Infiltration) लगाया जाए, तो भी यह उतना ही प्रभावी है।इससे दवा की मात्रा में 90% से अधिक की कमी आई। जो इलाज पहले हजारों में होता था, वह कुछ सौ रुपयों में संभव हो गया।इसी शोध के आधार पर WHO ने 2018 में अपने 40 साल पुराने दिशानिर्देशों को बदला और इस भारतीय मॉडल को पूरी दुनिया के लिए मानक बनाया।
WHO की समिति में उनकी शोध-आधारित भूमिका
WHO की मलेरिया और उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (NTD) विभाग की पर्यवेक्षी समिति में उनकी मौजूदगी से भारत को निम्नलिखित शोध लाभ होंगे।वे यह सुनिश्चित करेंगे कि वैश्विक नीतियां केवल प्रयोगशाला के आंकड़ों पर नहीं, बल्कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों जैसे ‘रीयल-वर्ल्ड डेटा’ पर आधारित हों।जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों के स्वतंत्र विशेषज्ञ के रूप में, वे ‘वन हेल्थ’ (One Health) फ्रेमवर्क के तहत नए शोध मॉडल्स को प्रोत्साहित करेंगे।



