
संसद में बिल गिरने पर हिमाचल की सियासत गरमाई; भाजपा ने कहा— ‘नारी शक्ति का अपमान’, कांग्रेस बोली— ‘नहीं झुकने देंगे संविधान’
IBEX NEWS BUREAU
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पारित नहीं हो पाया. बिल के पक्ष में 298 और इसके खिलाफ 300 वोट पड़े. बिल पास होने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी. यह बिल दो तिहाई बहुमत से पास नहीं हो पाया है. ऐसे में इसके आगे की कार्यवाही की कोई संभावना नहीं है. महिला आरक्षण बिल के पारित न होने पर जहां भाजपा ने नाराजगी जताई तो वहीं कांग्रेस ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया है।
लोकसभा में महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल के पारित न होने पर हिमाचल प्रदेश के दो दिग्गज नेताओं— पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और वर्तमान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इस विधायी घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नया उबाल ला दिया है।संसद में मचे इस घमासान की गूँज अब हिमाचल की गलियों और पंचायतों तक पहुँचती दिखेगी । जानकारों का मानना है कि इस बार ‘गांव की सरकार’ चुनने के लिए विकास से ज्यादा ‘महिला आरक्षण’ और ‘संवैधानिक मर्यादा’ जैसे बड़े मुद्दे ढाल बनाए जाएंगे।
जहाँ भाजपा इस मुद्दे को लेकर गांव-गांव जाकर महिलाओं के बीच यह संदेश देने की तैयारी में है कि कांग्रेस ने उनके हक पर ‘कैंची’ चलाई है, वहीं कांग्रेस अपनी ‘संविधान बचाओ’ की दलील के साथ मतदाताओं के बीच जाएगी।जयराम ठाकुर के बयान से साफ है कि भाजपा इसे “मातृ शक्ति का अपमान” बताकर महिला वोट बैंक को सीधे साधने की कोशिश करेगी।भाजपा का रुख रहेगा कि बिल का गिरना महिला सशक्तिकरण की राह में बड़ी बाधा है ।कांग्रेस का तर्क कि सहमति और संवैधानिक संतुलन के बिना कोई भी निर्णय स्वीकार्य नहीं।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने इसे “संविधान की जीत” बताकर यह संकेत दिया है कि वे बैकफुट पर जाने के बजाय इसे ‘लोकतंत्र की रक्षा’ के रूप में पेश करेंगे।साफ है कि हिमाचल में आने वाले पंचायत चुनाव केवल स्थानीय मुद्दों पर नहीं, बल्कि संसद से शुरू हुई इस ‘सियासी जंग’ के साये में लड़े जाएंगे। अब देखना यह होगा कि हिमाचल की जागरूक मातृ शक्ति ‘अधिकार’ की बात करने वालों का साथ देती है या ‘संविधान’ की दुहाई देने वालों पर भरोसा जताती है।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, TMC और समाजवादी पार्टी पर ‘महिला विरोधी’ होने का ठप्पा लगाया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि दशकों की प्रतीक्षा के बाद जब महिलाओं को उनका हक मिलने वाला था, तब विपक्षी दलों ने इसे रोककर नारी शक्ति का अपमान किया है।जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि 33% आरक्षण बिल को गिराने के बाद विपक्ष का ‘उत्सव’ मनाना निंदनीय है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “नारी शक्ति के अपमान की यह बात दूर तक जाएगी और विपक्ष को इसकी भारी राजनीतिक कीमत चुकानी होगी।”

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस घटनाक्रम को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के रूप में पेश किया है। उन्होंने संसद में बिल पारित न होने को ‘INDIA’ गठबंधन की वैचारिक जीत करार दिया।सीएम ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के हितों की आड़ लेकर संविधान की मूल भावना को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि कांग्रेस ऐसे किसी भी प्रस्ताव का विरोध करती रहेगी जो देश की एकता और संतुलन को बिगाड़ने का प्रयास करेगा। सुक्खू ने जोर देकर कहा कि कोई भी निर्णय व्यापक सहमति से होना चाहिए, न कि थोपा जाना चाहिए।
- बड़ी बात ये है कि दोनों नेताओं के बयानों ने साफ कर दिया है कि आगामी चुनावों में ‘महिला आरक्षण’ और ‘संवैधानिक मर्यादा’ मुख्य चुनावी मुद्दे होंगे।



